मुंबई, 29 अक्टूबर।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हिंदी सिनेमा की अंदरूनी कार्यप्रणाली और फिल्म जगत में अपनी स्थिति पर अत्यंत स्पष्ट एवं निष्पक्ष दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। लंबे समय से अभिनय की दुनिया में निरंतर सक्रिय रहने के बावजूद वे आज भी स्वयं को बॉलीवुड का अंदरूनी हिस्सा नहीं मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यद्यपि वे फिल्म जगत से जुड़े हैं, तथापि उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं होता कि वे पूरी तरह इसी दुनिया के हैं।
अभिनेता के अनुसार, सिनेमा जगत को एक आत्मीय परिवार के रूप में दिखाना जमीनी सच्चाई से काफी परे है। इस क्षेत्र में योग्यता और परिश्रम के अलावा आपसी जान-पहचान और रसूख भी खासा प्रभाव रखते हैं, जबकि साथी कलाकारों द्वारा एक-दूसरे की सफलताओं का खुले दिल से स्वागत करने की परिपाटी काफी कम देखने को मिलती है।
मनोज का दृढ़ मत है कि किसी भी कलाकार की वास्तविक साख केवल उसकी योग्यता और अभिनय क्षमता से तय होती है। उनके दृष्टिकोण में व्यक्तिगत समीकरणों और लोगों की प्रशंसा की तुलना में अपने अभिनय कौशल के प्रति निष्ठावान रहना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
वे इस बात पर विशेष बल देते हैं कि हर कलाकार का संपूर्ण ध्यान अपनी कला के परिष्कार पर केंद्रित होना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी पेशेवर क्षेत्र में लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहने के लिए अपने हुनर के प्रति अटूट समर्पण और कार्य की गुणवत्ता ही सबसे प्रमुख आधार बनती है।
वर्तमान में मनोज बाजपेयी नेटफ्लिक्स पर प्रसारित वेब सीरीज 'गजब रात' में अपने अभिनय का जादू बिखेर रहे हैं। अपने लंबे फिल्मी सफर में उन्होंने विविध प्रकार के जीवंत किरदारों के माध्यम से अपनी एक विशिष्ट पहचान गढ़ी है। बॉलीवुड की आंतरिक गुटबाजी और संबंधों को लेकर दिया गया उनका यह खरा बयान एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। उनकी बातों से यह स्पष्ट परिलक्षित होता है कि वे किसी चाटुकारिता के बजाय केवल अपनी प्रतिभा के बल पर ही मुकाम बनाए रखना चाहते हैं।














