राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं है। यह चरित्र निर्माण, सामाजिक सद्भाव और मानव कल्याण की भावना को भी मजबूत करती है। उनके अनुसार, प्राच्यविद्या के अध्ययन से भारतीय सभ्यता के विकास और विभिन्न विचारधाराओं के बीच हुए संवाद को समझने का अवसर मिलता है।
प्राचीन ग्रंथों और भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और भारतीय दर्शन के ग्रंथों में जीवन, नैतिकता, कर्तव्य और सामाजिक समरसता से जुड़े महत्वपूर्ण विचार मौजूद हैं। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत और भाषाओं के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषाओं और अनुसंधान को दिए गए महत्व का भी उल्लेख किया। साथ ही, ज्ञान भारतम् मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, संरक्षण और अंकीयकरण के कार्य को महत्वपूर्ण बताया।
राज्यपाल ने युवा शोधार्थियों से प्राचीन ग्रंथों का मूल पाठ पढ़ने और शोध के दौरान प्रमाणिकता, पारदर्शिता तथा बौद्धिक ईमानदारी बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान का सर्वोच्च उद्देश्य मानवता के कल्याण में योगदान देना है।
स्वामी रामदेव ने शास्त्र शुद्धि अभियान की बात कही
सम्मेलन में स्वामी रामदेव ने बताया कि 30 अक्टूबर को भारत विद्वत परिषद, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और विभिन्न गुरु परंपराओं के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल होंगे। इनमें जगद्गुरु शंकराचार्य, रामानंदाचार्य और रामानुजाचार्य परंपराओं के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
स्वामी रामदेव ने कहा कि शास्त्रों की गलत व्याख्या और सनातन परंपरा को लेकर उठने वाले विवादों के बीच पतंजलि से शास्त्र शुद्धि अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा का अपमान करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कराई जाएगी। उन्होंने जाति के आधार पर समाज को विभाजित करने के बजाय एकता पर जोर दिया।
मूल ग्रंथों के अध्ययन और संरक्षण पर चर्चा
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने सम्मेलन को सनातन परंपरा के मूल ग्रंथों और विचारों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक परिस्थितियों में मूल ग्रंथों में भ्रामक सामग्री जोड़े जाने का दावा किया जाता रहा है, इसलिए ग्रंथों का अध्ययन तर्क और प्रमाण के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पतंजलि योग, आयुर्वेद और वनस्पति विज्ञान के क्षेत्रों में काम कर रहा है। विश्वविद्यालय आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर और विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वान तथा शोधार्थी मौजूद रहे।















