गासा (भूटान), 30 अक्टूबर।
उत्तर-पश्चिम भूटान स्थित शिंताफू झील में ग्लेशियर झील का बांध टूटने से उपजी बाढ़ के कारण पश्चिम बंगाल और असम के कई जिलों में अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी गई है। इस घटना के बाद से संबंधित अधिकारी सीमावर्ती नदियों के आसपास के इलाकों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
यह घटना वीरवार शाम को गासा जिले में घटी। भूटान के गासा स्थित इस झील के फटने से मो छू नदी में पानी का भारी सैलाब आ गया, जिससे लोकप्रिय गर्म पानी के झरने 'गासा त्साचू' का ढांचा बह गया। गनीमत यह रही कि सैलाब आने से पूर्व ही इलाके को पूरी तरह खाली करा लिया गया था, जिससे किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। शिंताफू झील उन 17 झीलों में शुमार है जिन्हें संवेदनशील माना जाता है। इससे पहले अगस्त 2021 में भी इसी जगह पर फ्लैश फ्लड आया था, जिससे गासा त्साचू को काफी क्षति पहुंची थी।
बाढ़ का पानी आगे बढ़ते हुए पुनाखा जोंग से लगभग आठ किलोमीटर दूर काबेसा गेवोग के श्रीगंग क्षेत्र को पार कर चुका है, जिससे नदी के निचले हिस्सों में रहने वालों की चिंता बढ़ गई है। भूटान प्रशासन ने बंगाल और असम के प्रशासनिक अमले को इस बारे में सूचित कर दिया है। असम का धुबरी जिला तथा बंगाल की दार्जिलिंग पहाड़ियां, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी संवेदनशील क्षेत्र घोषित किए गए हैं। कूचबिहार प्रशासन ने संकोश नदी के पास रहने वालों को भी सचेत कर दिया है, जो उत्तरी भूटान से निकलकर ब्रह्मपुत्र में मिलती है।
अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शॉ ने नागरिकों से घबराने के बजाय संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग थोड़े सहमे हुए हैं लेकिन डरने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पूरा प्रशासनिक अमला मुस्तैद है और सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि कुछ ही घंटों में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ जाएगी।
इस प्राकृतिक आपदा से भूटानी भूभाग में भी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। पुनाखा के गुमा गेवोग इलाके में नया सोलर सिंचाई तंत्र आंशिक रूप से नष्ट हो गया है। इसके अलावा जोमलिंगथांग क्षेत्र में पुनाखा-गासा राजमार्ग का हिस्सा मलबे की चपेट में आ गया है, जिससे आवागमन बाधित होने की आशंका है।
ग्लेशियर झील फटने की इस प्रक्रिया में पहाड़ के पीछे बनी झील का पानी प्राकृतिक बांध टूटने, भारी बारिश या भूस्खलन के कारण एकदम से बाहर निकल आता है। तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिसके चलते इस तरह के हादसों की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।















