गणेश चतुर्थी हो या दुर्गा विसर्जन जुलूस, झांकियों का स्वागत हो, सभी मामले बहुत ही संवेदनशील थे और बिना किसी विवाद के संपन्न भी हो गए। लेकिन एक बड़े घटनाक्रम के बाद कुछ माननीय आपस में चर्चा करते हुए नजर आए कि बहुत उड़ने लगा था, आ गए अंकल ठिकाने। अब अकल किसकी ठिकाने लगी, क्या हुआ, यह चर्चा में है।















