काठमांडू, 31 अक्टूबर।
नेपाल में पत्रकारों को हिरासत में लेने और मीडिया संस्थानों के समाचार कक्षों में पुलिस के पहुंचने को लेकर विवाद बढ़ गया है। नेपाल पुलिस ने आधी रात जारी बयान में कहा कि समाचारों की सत्यता के संबंध में सामान्य जानकारी लेने के लिए कुछ पत्रकारों को साइबर ब्यूरो बुलाना गलत नहीं था। पुलिस ने अपनी कार्रवाई को उचित और सही मंशा से किया गया कदम बताया।
शुक्रवार देर रात सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी कई मीडिया संस्थानों के समाचार कक्षों में पहुंचे और कुछ पत्रकारों को हिरासत में लिया। व्यापक विरोध के बाद पत्रकारों को रिहा कर दिया गया। इसके बाद पुलिस ने रात करीब 1:40 बजे व्हाट्सएप समूह के माध्यम से आधिकारिक बयान जारी किया।
पुलिस प्रवक्ता अविनारायण काफ्ले ने कहा कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों पर नेपाल पुलिस के संबंध में भ्रामक समाचार और संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। इससे पुलिस की पेशेवर छवि, आम लोगों के भरोसे और सरकार तथा पुलिस संगठन के संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका थी।
प्रवक्ता के अनुसार, इस विषय पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी चिंता जताई थी। इसी के बाद साइबर ब्यूरो ने कुछ पत्रकारों को समाचारों की सत्यता, तथ्यपरकता और कानूनी आधार के बारे में सामान्य जानकारी लेने के लिए कार्यालय बुलाया था। पुलिस ने इसे अपने नियमित कामकाज का हिस्सा बताया।
शुक्रवार शाम सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी नेपाल प्रेस डॉट कॉम के पत्रकार बिश्वमणि सुबेदी, डीएनए खबर के पत्रकार धीरज बस्नेत और मोटिवेट न्यूज के पत्रकार शोभराज बराल को उनके संस्थानों के समाचार कक्षों से हिरासत में ले गए थे।
पुलिसकर्मी पत्रकार नवराज मैनाली को हिरासत में लेने के लिए नया पत्रिका के कार्यालय भी पहुंचे थे। मैनाली वहां नहीं मिले, जिसके बाद पुलिस और संपादक खगेन्द्र पंत के बीच करीब ढाई घंटे तक बहस हुई।
पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने के बाद विरोध तेज हो गया। इस पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के सचिवालय ने कहा कि इस कार्रवाई में प्रधानमंत्री, उनके सचिवालय या प्रधानमंत्री कार्यालय की कोई भूमिका नहीं थी।
प्रधानमंत्री की प्रेस सलाहकार दीपा दाहाल ने शुक्रवार शाम फेसबुक पर बयान जारी कर बताया कि प्रधानमंत्री को पत्रकारों की गिरफ्तारी की पहले से जानकारी नहीं थी। घटना का पता चलते ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों को हिरासत में लिए गए पत्रकारों को तुरंत रिहा करने और समाचार कक्षों में प्रवेश कर किसी भी तरह की धरपकड़ नहीं करने के निर्देश दिए थे।
नेपाल पुलिस ने अपने बयान में कहा कि वह प्रेस को राज्य का चौथा स्तंभ मानती है और पत्रकारों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। पुलिस ने प्रेस की स्वतंत्रता तथा संचारकर्मियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।















