ढाका, 31 अक्टूबर।
भारत में तीन साल की जेल की सजा पूरी करने के बाद 10 बांग्लादेशी महिलाएं अपने देश वापस पहुंच गई हैं। गुरुवार रात भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित बेनापोल अंतरराष्ट्रीय चेकपोस्ट के जरिए उन्हें बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपा गया। ये महिलाएं करीब चार साल पहले मानव तस्करों की मदद से अवैध रूप से भारत आई थीं।
बेनापोल इमिग्रेशन पुलिस के प्रभारी अधिकारी सैफुर रहमान के अनुसार, भारतीय इमिग्रेशन पुलिस ने रात करीब 8:30 बजे पश्चिम बंगाल के पेट्रापोल में महिलाओं को बांग्लादेशी अधिकारियों के हवाले किया। इस दौरान सीमा सुरक्षा बल, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश और दोनों देशों की पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।
ये महिलाएं बांग्लादेश के नरेल, जशोर और फरीदपुर जिलों के अलग-अलग क्षेत्रों की रहने वाली हैं। करीब चार साल पहले मानव तस्करों के माध्यम से वे सतखिरा सीमा से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थीं।
भारत पहुंचने के बाद सभी महिलाएं महाराष्ट्र के पुणे शहर चली गईं। वहां उन्होंने अलग-अलग घरों में घरेलू सहायिका के रूप में काम किया। बाद में भारत में अवैध रूप से रहने के आरोप में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने अवैध प्रवेश के मामले में तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें पुणे की केंद्रीय जेल में रखा गया।
सजा पूरी होने के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक प्रयास किए गए और जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद भारतीय इमिग्रेशन अधिकारियों ने विशेष यात्रा परमिट के तहत सभी महिलाओं को बांग्लादेश भेज दिया।
बेनापोल में इमिग्रेशन संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रात करीब 11 बजे महिलाओं को बेनापोल पोर्ट पुलिस स्टेशन के सुपुर्द किया गया। इसके बाद गैर-सरकारी संगठन जस्टिस एंड केयर ने उन्हें अपनी देखरेख में ले लिया।
संगठन के अधिकारी महिलाओं को जशोर स्थित अपने आश्रय गृह ले गए हैं। वहां उनके रहने और देखभाल की व्यवस्था की जाएगी। संबंधित अधिकारियों की मदद से उन्हें उनके परिवारों से मिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
तीन साल की सजा पूरी होने के बाद इन महिलाओं की वापसी भारत और बांग्लादेश के बीच जरूरी कानूनी तथा राजनयिक प्रक्रियाओं के पूरा होने से संभव हो सकी।















