कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई यह कार्यवाही तीन घंटे 23 मिनट चली। इसकी अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। संसद की कार्यवाही की तर्ज पर आयोजित इस मॉक संसद में खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जिसे उपस्थित सांसदों ने सर्वसम्मति से पारित किया।
राहुल गांधी ने चुनाव की वैधता पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि एसआईआर के जरिए हटाए गए मतदाता देश के कुल मतदाताओं का करीब 15 प्रतिशत हैं। उनके अनुसार, इनमें से कई लोगों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान किया था, जबकि उस चुनाव में जीत का अंतर लगभग तीन प्रतिशत था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अब इन मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, तो क्या निर्वाचन आयोग पिछले चुनाव की वैधता पर सवाल उठा रहा है?
राहुल ने आरोप लगाया कि विपक्ष के लिए संस्थानों के दरवाजे बंद होने के कारण उसे बगीचे में बैठकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्यवाही करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि मताधिकार को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों को एक दिन जनता के प्रतिनिधियों के सामने जवाब देना होगा।
खरगे ने लगाए आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल
खरगे ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर निर्वाचन आयोग चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का ज्ञानेश कुमार से व्यक्तिगत विरोध नहीं है, बल्कि उसकी मांग है कि आयोग संविधान के अनुरूप स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करे।
खरगे ने दावा किया कि विपक्ष के 193 सांसदों ने करीब सात महीने पहले संसद के दोनों सदनों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के नोटिस दिए थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि विपक्ष मृत मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखने की मांग नहीं कर रहा, बल्कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की बात कर रहा है।
प्रस्ताव में छह आरोप, कानूनी सुरक्षा हटाने की मांग
इंडी गठबंधन के प्रस्ताव में चुनाव में कथित हेरफेर की साजिश, एसआईआर के तहत मतदाताओं के नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव, ईआरओनेट और ईसीआईनेट के जरिए मतदाता सूची का नियंत्रण केंद्रीकृत करने, अन्य चुनाव आयुक्तों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखने और केंद्र सरकार के निर्देश पर काम करने सहित छह आरोप लगाए गए।
प्रस्ताव में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा समाप्त करने, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मुकदमा चलाने की मांग भी की गई। ये सभी आरोप विपक्ष की ओर से पेश प्रस्ताव का हिस्सा हैं।
मतदाता सूची से नाम हटने का दावा करने वाले लोग भी पहुंचे
कार्यक्रम में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हुए, जिन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का दावा किया। दिल्ली के कांता प्रसाद ने कहा कि वह जीवित हैं, लेकिन सूची में उन्हें मृत घोषित कर नाम काट दिया गया। पश्चिम बंगाल के इफ्तिकार ने अपने पिता का नाम हटाए जाने की बात कही। दिल्ली की अनीता जायसवाल ने कहा कि नाम कटने से उन्हें अपनी बेटी की पढ़ाई और छात्रवृत्ति को लेकर चिंता है।
कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहीं मीरा कुमार ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों में जवाबदेही तय नहीं हो रही है। विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने भी निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।
उल्लेखनीय है कि यह जन महाभियोग एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यवाही थी। इससे मुख्य निर्वाचन आयुक्त स्वत: पदमुक्त नहीं होते। उन्हें हटाने के लिए संविधान में निर्धारित संसदीय प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
इंडी गठबंधन रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एसआईआर में कथित गड़बड़ियों के विरोध में रैली करेगा। कांग्रेस ने रैली में 10 लाख लोगों के शामिल होने की तैयारी का दावा किया है। गठबंधन मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी उठाएगा।
















