चुग ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को अपनी और सरकार की छवि चमकाने के लिए बड़े-बड़े होर्डिंग लगाने का शौक है, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उनका बकाया महंगाई भत्ता देने के मामले में सरकार पीछे हट रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब की सेवा में पूरा जीवन लगाने वाले कर्मचारियों को अपने अधिकार के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
डीए भुगतान में देरी पर सवाल
चुग के अनुसार, हाई कोर्ट ने 3 अगस्त को निर्देश दिया था कि केंद्र सरकार के अनुरूप लंबित डीए की सभी किस्तों का भुगतान दो सप्ताह के भीतर किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने आदेश का पालन करने के बजाय मामला लंबित रखा।
चुग ने कहा कि हाई कोर्ट की यह टिप्पणी कि सरकार चांद या मंगल ग्रह पर होर्डिंग लगाने के बजाय पहले अपनी वैधानिक जिम्मेदारियां पूरी करे, मान सरकार के लिए कड़ी फटकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विज्ञापनों के जरिए अपनी उपलब्धियों का प्रचार कर रही है, जबकि कर्मचारियों के बकाया भुगतान की अनदेखी की जा रही है।
520 रुपये की कोर्ट फीस पर भी उठाए सवाल
चुग ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील की सुनवाई सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक 520 रुपये की कोर्ट फीस तक जमा नहीं कराई। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को यह पूछना पड़ा कि क्या सरकार के पास इतनी राशि भी नहीं है।
चुग ने दावा किया कि सरकार अन्य मामलों को 24 घंटे में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने में सक्षम है, लेकिन कर्मचारियों के डीए से जुड़े मामले में अपील की खामियां दूर कराने और सुनवाई सुनिश्चित करने में दो महीने से अधिक समय लगा दिया गया।
उन्होंने मांग की कि भगवंत मान सरकार तत्काल हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करे और कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों की लंबित डीए किस्तों का भुगतान सुनिश्चित करे। चुग ने कहा कि पंजाब के खजाने का उपयोग राजनीतिक प्रचार के बजाय लोगों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए होना चाहिए।
















