दिल्ली में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की 72वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधारों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बदलती परिस्थितियों और जन अपेक्षाओं के अनुरूप प्रशासनिक ढांचे को लगातार विकसित करना होगा।
राधाकृष्णन ने कहा कि शासन का उद्देश्य आर्थिक प्रगति को प्रत्येक नागरिक के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर अवसरों में बदलना होना चाहिए। प्रशासन की सफलता का आकलन केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर, खुशहाली और समग्र कल्याण में आए बदलाव से भी किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शासन व्यवस्था से अधिक तेज, तकनीक आधारित, आंकड़ों पर आधारित और नागरिकों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होने की अपेक्षा की जा रही है। केंद्र, राज्य और जिला प्रशासन के बीच समान लक्ष्य और दृष्टिकोण से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह समावेशी विकास और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया। राधाकृष्णन ने कहा कि जनकल्याण के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस तरह किया जाना चाहिए कि पर्यावरण की स्थिरता प्रभावित न हो।
लोक प्रशासन में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार
उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह, महानिदेशक डॉ. सुरेंद्र कुमार बागड़े तथा संस्थान के संकाय सदस्यों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने संस्थान को भविष्य के लिए सक्षम और कुशल सिविल सेवक तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।
कार्यक्रम के दौरान लोक प्रशासन में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘पॉल एच. एप्पलबी पुरस्कार’, अकादमिक उत्कृष्टता के लिए ‘डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार’ और ‘सर्वश्रेष्ठ आईआईपीए शाखा पुरस्कार’ प्रदान किए गए।
इस अवसर पर संस्थान की आम सभा और कार्यकारी परिषद के सदस्य, संकाय तथा विभिन्न क्षेत्रीय शाखाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
















