इंदौर, 02 नवंबर।
आयुष चिकित्सा पद्धति के तहत यूनानी चिकित्सा को बढ़ावा देने और शोध-अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रविवार को होटल सयाजी में चौथी यूनानी राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। यूनानी मेडिकल प्रैक्टिशनर वेलफेयर एसोसिएशन और यूनि हर्बल हेल्थ केयर के सहयोग से हुए इस आयोजन में मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लगभग 210 चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला में अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज, इंदौर की आयुर्वेद कैंसर इकाई के प्रमुख प्रोफेसर अखिलेश भार्गव, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ यूनानी मेडिसिन, बेंगलुरु की प्रोफेसर अर्शिया सुल्ताना, जुपिटर अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद अली, भोपाल के डॉ. मोहम्मद शाहिद खान और चेन्नई की डॉ. यासीन बानो ने अपने विचार रखे।
प्रोफेसर अखिलेश भार्गव ने यूनानी चिकित्सा में शोध और अनुसंधान को गति देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि किसी भी चिकित्सा पद्धति के विकास और उसकी उपयोगिता को व्यापक स्तर पर स्थापित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन, प्रमाणिक आंकड़ों का संकलन और अनुसंधान आधारित प्रयास आवश्यक हैं।
कार्यशाला में यूनानी चिकित्सा के प्रसार, चिकित्सा संबंधी आंकड़े जुटाने, शोध गतिविधियों का दायरा बढ़ाने और चिकित्सा क्षेत्र में नए अनुसंधानों को प्रोत्साहन देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इस दौरान चिकित्सकों ने अपने अनुभव और विचार भी साझा किए।
कार्यक्रम में आयोजक डॉ. खालिद खान और डॉ. एसएच जैदी सहित विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सक तथा विशेषज्ञ उपस्थित रहे।















