पिछले दिनों विंध्य क्षेत्र में सत्ताधारी दल के दो पदाधिकारी आपसी मतभेद को थाने तक जाने से रोककर पार्टी और सरकार की किरकिरी होने से बचाने की कोशिश में सफल तो हो गए, लेकिन अपनी सार्वजनिक रूप से हो रही उपेक्षा और बेइज्जती को अधिक दिनों तक रोक नहीं सके।
कुछ अपनों की सलाह पर नवनियुक्त प्रभारी के सामने अपनी उपेक्षा और बेइज्जती को सार्वजनिक कर वे फिर चर्चा में हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चर्चा शिकायतों से ज्यादा इस बात की हो रही है कि इसके पीछे कौन-सा बड़ा नेता है।















