नर्मदापुरम, 02 नवंबर।
नर्मदापुरम सेंट्रल जेल में जो हो रहा है, वह केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि दंड व्यवस्था के मूल दर्शन में बदलाव का संकेत है। जिन बंदियों को अपना नाम लिखना तक नहीं आता था, वे अब अंग्रेजी बोलना सीख रहे हैं और सुबह अधिकारियों का अभिवादन ‘गुड मॉर्निंग’ और ‘थैंक यू सर’ कहकर करते हैं। यह दृश्य छोटा लग सकता है, लेकिन इसका सामाजिक अर्थ बड़ा है। जेलें केवल सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि सुधार गृह बनें, यही न्याय का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।
इस प्रयोग की खास बात यह है कि इसमें बाहर से शिक्षकों को बुलाने के बजाय जेल में बंद उच्च शिक्षित बंदी बुजेंद्र, रियाज खान, उमाकांत, सीताराम और अखिलेश दूसरे बंदियों को स्मार्ट बोर्ड की मदद से अंग्रेजी सिखा रहे हैं। जेल शिक्षक हरिओम सिंह और राज प्रताप की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। यह मॉडल दोहरा सुधार करता है। एक ओर निरक्षर बंदी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, तो दूसरी ओर शिक्षित बंदी अपने ज्ञान का सकारात्मक उपयोग कर रहे हैं। इससे ज्ञान के साथ विश्वास और आत्मसम्मान भी बढ़ता है।
जेल में करीब 32 निरक्षर बंदी अंग्रेजी के बुनियादी शब्द सीख रहे हैं। अभिराम, अभिषेक, नीलेश और अर्जुन अंग्रेजी में बातचीत करना सीख गए हैं। जेल पुस्तकालय में हिंदी और अंग्रेजी की लगभग 1500 पुस्तकें हैं। बंदियों की शिक्षा के लिए पांचवीं, दसवीं और बारहवीं के साथ बीए और एमए की पढ़ाई की व्यवस्था भी है। शिक्षा सत्र 2025-26 में पांचवीं के 38 बंदी उत्तीर्ण हुए, जबकि दसवीं और बारहवीं में लगभग 20 बंदियों ने सफलता प्राप्त की। वर्तमान में 14 बंदी बीए और दो बंदी एमए की पढ़ाई कर रहे हैं।
शिक्षा बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद रोजगार, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन के अवसर देती है। अशिक्षा और अवसरों की कमी दोबारा अपराध की ओर धकेल सकती है, जबकि शिक्षा नए विकल्प खोलती है। इसलिए जेल में शिक्षा देना दया नहीं, बल्कि अपराध रोकने और समाज को सुरक्षित बनाने की प्रभावी नीति है।
नर्मदापुरम सेंट्रल जेल का यह नवाचार देश की दूसरी जेलों के लिए भी मॉडल बन सकता है। जरूरत है कि इस सोच को व्यापक नीति का हिस्सा बनाया जाए और जेलों में शिक्षा के साथ कौशल विकास के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएं। सजा का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सुधारकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। यही वास्तविक सुधार है और यही वास्तविक न्याय है।














