कोलकाता, 3 नवंबर।
पूर्व बर्दवान जिले के खंडघोष स्थित बादुलिया गांव के युवा वैज्ञानिक साबिर हुसैन ने अपने आविष्कार से अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की है। उनके विकसित किए गए ‘स्टॉप ब्लीड’ पाउडर से महज 30 सेकंड में रक्तस्राव रोकने का दावा किया गया है। 29 अक्टूबर को सिंगापुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ‘स्लिंगशॉट 2026’ प्रतियोगिता में साबिर को ग्रैंड विजेता घोषित किया गया।
स्वास्थ्य और जैव-चिकित्सा श्रेणी में उनके स्टार्टअप ‘मिराक्यूलस’ ने पहला स्थान प्राप्त किया। इस उपलब्धि के साथ कंपनी को चार लाख सिंगापुर डॉलर की अनुदान राशि भी मिली।
यह स्टार्टअप राउरकेला स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के जैव-प्रौद्योगिकी एवं चिकित्सा अभियांत्रिकी विभाग के सहयोग से काम कर रहा है। प्रोफेसर देवेंद्र वर्मा के मार्गदर्शन में तैयार पाउडर का उद्देश्य दुर्घटनाओं, चोटों और आपात स्थितियों में रक्तस्राव को तेजी से नियंत्रित करना है।
साबिर को इस नवाचार के लिए पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2019 में दिल्ली के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन भवन में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।
साबिर ने शुरुआती पढ़ाई खंडघोष के स्कूल से की और बर्दवान से उच्च माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता के एक कॉलेज से बीटेक तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राउरकेला से जैव-चिकित्सा विषय में एमटेक की पढ़ाई पूरी की।
‘स्टॉप ब्लीड’ पाउडर को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से मंजूरी मिल चुकी है। अब तक 250 से अधिक अस्पतालों और कई सैन्य इकाइयों में इस तकनीक का उपयोग किया जा चुका है।
सिंगापुर में मिली सफलता पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान प्रबंधन ने साबिर को बधाई दी है। गांव से निकलकर अपने वैज्ञानिक नवाचार के जरिए वैश्विक मंच पर पहचान बनाने वाले साबिर की उपलब्धि बंगाल के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।















