नई दिल्ली, 03 नवंबर।
सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन के नाम पर किसी भी स्थान पर अनिश्चितकाल तक कब्जा जमाने को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगहों पर भी समय सीमा तय होनी चाहिए। यह टिप्पणी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और हाल ही में रामलीला मैदान में निर्वाचन आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के आंदोलन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई।
सरकार ने जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाकर तीन वैकल्पिक स्थानों की घोषणा की है। इनमें रामलीला मैदान भी शामिल है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन का आह्वान करने वालों को उससे उत्पन्न होने वाले परिणामों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी स्थान पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता। अन्य लोगों और संगठनों को भी प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक समूह किसी जगह पर लगातार प्रदर्शन करता रहेगा, तो किसान और वकील जैसे अन्य वर्गों के लिए स्थान कहां बचेगा।
मेहता ने अदालत को बताया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के लिए केवल एक दिन की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित समय के बाद भी स्थल खाली नहीं किया और संसद की ओर मार्च किया। उन्होंने कहा कि संसद और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें व्यापारिक संगठनों की ओर से त्योहारों के दौरान प्रदर्शन रोकने की मांग, कथित सामूहिक हिरासत, पुलिस कार्रवाई, मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और इंटरनेट सेवाएं बाधित करने से जुड़े मामले शामिल हैं।
अदालत ने व्यापारिक संगठनों से कहा कि प्रदर्शन के कारण कारोबार को हुए नुकसान के मामले में आंदोलन आयोजित करने वाले राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों को भी याचिका में पक्षकार बनाया जाए। पीठ ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को शामिल किए बिना मामले में निर्णय करना उचित नहीं होगा।
सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अदालत की टिप्पणियां शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार और नागरिकों के कारोबार तथा आजीविका के अधिकार के बीच संवैधानिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि प्रदर्शन स्थल के आसपास के क्षेत्रों में करीब 50 लाख लोग रहते हैं। प्रदर्शन के कारण सभी दुकानें बंद रहीं और कनॉट प्लेस में भी सन्नाटा पसरा रहा।
इससे पहले 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और 12 विपक्षी नेताओं की याचिका पर निर्वाचन आयोग सहित अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। याचिका में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया था।















