मुंबई, 03 नवंबर।
अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' के निर्देशक हनी त्रेहान ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के नए निर्देशों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन बदलावों को कायरता और तानाशाही का प्रतीक बताते हुए देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई है।
हनी त्रेहान ने सोशल मीडिया पर अपनी फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए कहा कि बोर्ड की नई व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, ये निर्देश देश में बढ़ती असहिष्णुता और अभिव्यक्ति की आजादी पर लगाम लगाने की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
निर्देशक की यह नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब उनकी फिल्म 'सतलुज' को प्रमाणन और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण लंबे समय तक मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने मुख्य भूमिका निभाई है।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फिल्म इसी साल ओटीटी मंच जी5 पर रिलीज हुई थी। हालांकि, रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे मंच से हटा दिया गया था।
गौरतलब है कि सीबीएफसी ने 2 नवंबर को फिल्म निर्माताओं के लिए नई सलाह जारी की थी। इसके अनुसार, अब अधूरी फिल्मों को प्रमाणन के लिए बोर्ड के पास भेजने की अनुमति नहीं होगी। फिल्म में सभी दृश्य, ग्राफिक्स, गाने, पार्श्व संगीत और अन्य तकनीकी कार्य पूरी तरह तैयार होने चाहिए।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदन या प्रचार के दौरान फिल्म के लिए दर्ज किया गया नाम अंतिम नहीं माना जाएगा। समीक्षा के दौरान जरूरत पड़ने पर फिल्म के नाम में बदलाव किया जा सकता है।
नई व्यवस्था के तहत निर्माताओं की ओर से घोषित रिलीज की तारीख को प्रमाणन प्रक्रिया में प्राथमिकता देने का दबाव भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। बोर्ड ने साफ किया है कि फिल्मों को निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।












