केकोवा, 04 नवंबर।
तुर्किये के दक्षिणी तट पर केकोवा द्वीप के पास समुद्र में करीब सौ फीट यानी 30 मीटर की गहराई पर मिली खोज ने समुद्री इतिहास के कई पुराने अध्यायों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अंकारा से आई खबर के अनुसार, यहां दुनिया के सबसे पुराने जहाजों में से एक का मलबा मिला है। यह मलबा लगभग 4,400 से 4,700 साल पुराना बताया जा रहा है और शुरुआती कांस्य युग का है। जिस समय मिस्र में पिरामिडों का निर्माण हो रहा था, उसी समय यह छोटा व्यापारिक जहाज पूर्वी भूमध्य सागर में सामान लेकर जा रहा था और फिर हजारों साल तक समुद्र में सोया रहा। तुर्किये सरकार ने भी इस खोज की पुष्टि की है। इसे मानव सभ्यता के व्यापारिक इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।
यह जहाज लगभग दस मीटर लंबा था और पूर्वी भूमध्य सागर में पूर्व से पश्चिम की ओर सामान ले जा रहा था। समुद्र की तलहटी से 30 से अधिक बड़े मिट्टी के भंडारण पात्र और पत्थर के तीन बड़े लंगर बरामद हुए हैं। इन पात्रों में प्राचीन जीवन और व्यापार के रहस्य छिपे हैं। एक विशेष पात्र पर मिले निशानों को लेकर शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका उपयोग समुद्री यात्रा के दौरान मक्खन या पनीर बनाने के लिए बिलौनी के रूप में किया जाता होगा। ताजा दूध के भंडारण के लिए भी ऐसे पात्रों का इस्तेमाल होने की संभावना है। यह खोज बताती है कि उस दौर में लोग व्यापार के साथ खाद्य पदार्थों के संरक्षण की कला भी जानते थे।
पुरातत्वविदों के अनुसार, यह जहाज उस समय का है, जब दुनिया में शहर बस रहे थे और विभिन्न सभ्यताएं एक-दूसरे से जुड़ रही थीं। उस युग में समुद्र ही राजमार्ग था और जहाज परिवहन का प्रमुख साधन थे। यह छोटा जहाज प्रमाण है कि कांस्य युग के लोग अपने गांवों और शहरों तक सीमित नहीं थे, बल्कि लंबी दूरी की समुद्री यात्राएं करते और व्यापार करते थे। यह खोज इस धारणा को भी चुनौती देती है कि प्राचीन काल में व्यापार मुख्यतः जमीन के रास्ते होता था। भूमध्य सागर हजारों साल पहले भी सामान, विचार और तकनीक के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र था।
जमीन पर लकड़ी सड़ जाती है और धातुओं में जंग लग जाती है, लेकिन समुद्र की गहराई में कम ऑक्सीजन जैसी परिस्थितियों के कारण कुछ पुरातात्विक अवशेष लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं। यही कारण है कि यह जहाज हजारों साल बाद भी अपने समय की कहानी सुना रहा है। मिट्टी के बर्तन उस दौर की निर्माण कला और खान-पान की जानकारी देते हैं, जबकि पत्थर के लंगर जहाजों को रोकने की तकनीक पर प्रकाश डालते हैं। जहाज की बनावट से उस समय के कारीगरों के कौशल का भी पता चल सकता है।
तुर्किये के लिए यह खोज पुरातात्विक महत्व के साथ राष्ट्रीय गौरव का विषय भी है। केकोवा द्वीप के आसपास का क्षेत्र पहले से ही प्राचीन लिसियन सभ्यता के जलमग्न अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है। इस जहाज की खोज से क्षेत्र के समुद्री इतिहास पर नए शोध की संभावनाएं बढ़ी हैं। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
यह खोज याद दिलाती है कि व्यापार और तकनीक आधुनिक युग की देन नहीं हैं। समुद्र इतिहास का विशाल संग्रहालय है, जिसकी गहराइयों में अब भी अनगिनत जहाज, नगर और कहानियां दफन हैं। जलवायु परिवर्तन और समुद्री प्रदूषण से ऐसे स्थलों को खतरा है। इसलिए उनका संरक्षण जरूरी है। रोबोटिक पनडुब्बियों, त्रिआयामी स्कैनिंग और डीएनए जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से वैज्ञानिक इन अवशेषों का अध्ययन कर सकते हैं। यह 4,700 साल पुराना जहाज बताता है कि हमारा अतीत केवल जमीन के नीचे नहीं, समुद्र की गहराइयों में भी छिपा है। उसे समझने के लिए इतिहास की इन अनमोल धरोहरों को खोजने और बचाने के प्रयास लगातार जारी रखने होंगे।















