गुरदासपुर, 04 नवंबर।
गुरदासपुर के पत्त्रवां गांव में बिक्रमजीत सिंह की हत्या केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह चेतावनी है कि नशे का कारोबार अब विरोध करने वालों की जान लेने लगा है। चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक यही सवाल है कि पंजाब में नशा क्यों नहीं रुक रहा है। पंजाब में बढ़ती हिंसा, देशविरोधी गतिविधियों, अलग खालिस्तान की मांग और गैंगवार के लिए बढ़ता नशे का कारोबार जिम्मेदार माना जा रहा है। यही कारण है कि भारत सरकार ने पंजाब सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से आगे बढ़ने और कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता जताई है। यह लड़ाई केवल पंजाब पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे भारत की है। इसलिए राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय से नशे के कारोबार पर रोक लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाने का समय आ गया है।
पहले दुश्मन बंदूक भेजता था, अब वह ड्रोन से हेरोइन भेजता है। पाकिस्तान की तरफ से पंजाब सीमा पर ड्रोन के जरिए नशे की खेप गिराई जा रही है। सीमा सुरक्षा बल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में सैकड़ों ड्रोन देखे गए और दर्जनों मार गिराए गए। लेकिन जितना पकड़ा जाता है, उससे अधिक गांवों तक पहुंच जाता है। इस नशे की बिक्री से मिलने वाला पैसा कनाडा और अमेरिका में बैठे गैंगस्टरों तथा खालिस्तान समर्थकों तक पहुंचता है। यही पैसा फिर हथियारों के रूप में पंजाब लौटता है। यह एक ऐसा जहरीला चक्र है, जिसे केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ही तोड़ सकती हैं।
इस मुद्दे पर भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। अरविंद केजरीवाल ने केंद्र पर आरोप लगाया कि जब सीमा केंद्र के पास है, तो तस्करी कैसे हो रही है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि नशे की खुदरा बिक्री रोकना राज्य पुलिस की जिम्मेदारी है। कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा और संगरूर के गुलजार सिंह जैसे मामलों में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। इस आरोप-प्रत्यारोप से कुछ हासिल नहीं होगा। पंजाब के लोग नारे नहीं, समाधान चाहते हैं। इसलिए अब एक संयुक्त कार्ययोजना की जरूरत है, जिसमें श्रेय लेने की होड़ के बजाय जिम्मेदारी बांटने पर जोर हो।
पहला कदम सीमा को सुरक्षित बनाना है। केंद्र को पंजाब की 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एंटी-ड्रोन प्रणाली मजबूत करनी चाहिए। थर्मल कैमरों और रडार से लैस निगरानी चौकियां बनाई जाएं। बीएसएफ और पंजाब पुलिस का संयुक्त ड्रोन प्रतिक्रिया दल गठित हो, जो ड्रोन दिखते ही तत्काल कार्रवाई करे। सीमा पर तैनात चौकियों को आधुनिक एंटी-ड्रोन उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, सीमावर्ती गांवों के युवाओं को निगरानी व्यवस्था से जोड़कर उन्हें संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
दूसरा कदम खुफिया जानकारी साझा करना है। एनआईए, आईबी, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और पंजाब पुलिस की विशेष कार्यबल का संयुक्त खुफिया केंद्र चंडीगढ़ में बनाया जाए। नियमित बैठकें हों और बड़े नशा तस्करों की जानकारी साझा की जाए। केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच सूचनाओं का बेहतर तालमेल पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में मदद करेगा। गैंगस्टरों के सोशल मीडिया खातों, विदेशी कॉल और हवाला लेनदेन पर भी कानून के दायरे में संयुक्त निगरानी जरूरी है।
तीसरा और सबसे अहम कदम नशे से अर्जित धन पर प्रहार करना है। नशे से कमाया पैसा ही गैंगवार और देशविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। प्रवर्तन निदेशालय और राज्य पुलिस को मिलकर तस्करों की अवैध संपत्ति की जांच करनी चाहिए और कानून के अनुसार उसे जब्त करने की कार्रवाई करनी चाहिए। इससे यह संदेश जाएगा कि नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति सुरक्षित नहीं रह सकती।
केवल पुलिस की सख्ती से नशा नहीं रुकेगा। पंजाब के हर जिले में प्रभावी नशामुक्ति और कौशल विकास केंद्र होने चाहिए, जहां युवाओं को इलाज के साथ रोजगार का प्रशिक्षण भी मिले। खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से हर ब्लॉक में खेल मैदान और व्यायाम सुविधाएं विकसित की जाएं। स्कूलों में जागरूकता अभियान चलें, ताकि बच्चे नशे के दुष्परिणाम समझ सकें। जब युवाओं के हाथ में नशे के बजाय खेल और रोजगार के अवसर होंगे, तो वे इस बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित होंगे।
राजनीतिक स्तर पर भी जवाबदेही जरूरी है। किसी भी दल के नेता का नशा तस्करों से संबंध सामने आए, तो निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर श्वेतपत्र जारी करें, जिसमें पिछले दस वर्षों में पकड़े गए तस्करों, सजा पाए आरोपियों और जब्त संपत्ति का विवरण हो। इससे जनता का भरोसा बढ़ेगा और पुलिस का मनोबल मजबूत होगा।
पंजाब वह धरती है, जिसने देश को अनाज दिया और सीमा की रक्षा की। आज वही पंजाब नशे के कारण बदनाम हो रहा है। यह चुनौती केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। नशे का बढ़ता कारोबार आम लोगों की सुरक्षा और देश की अखंडता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को एक मंच पर आना होगा। एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय मिलकर काम करना होगा। तभी पंजाब की गलियों में फिर भांगड़े की थाप सुनाई देगी, गैंगवार की गोलियां नहीं, और नशे पर प्रभावी वार करके पंजाब तथा देश, दोनों को सुरक्षित बनाया जा सकेगा।















