धार, 04 नवंबर।
सरकारी सेवा में करीब 20 साल के दौरान लगभग 65 लाख रुपये वेतन पाने वाले आदिम जाति सेवा सहकारी समिति नालछा के प्रबंधक शेरसिंह ठाकुर की संपत्तियां जांच के घेरे में हैं। लोकायुक्त की शुरुआती पड़ताल में उनके द्वारा संपत्तियों और वाहनों पर दो करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपये से अधिक खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह ज्ञात आय से 271 प्रतिशत से अधिक अनुपातहीन संपत्ति का मामला बताया जा रहा है।
लोकायुक्त पुलिस की तीन टीमों ने बुधवार तड़के सोडपुर, नालछा और मांडव में एक साथ तलाशी ली। जांच में करीब 97 लाख रुपये की लागत से बना दो मंजिला मकान, व्यावसायिक भवन, कृषि भूमि, वाहन और आधुनिक कृषि उपकरणों की जानकारी मिली। अधिकारियों को कुछ अन्य संपत्तियों और वाहनों के संकेत भी मिले हैं, जिनकी वास्तविक मालिकाना स्थिति की जांच की जा रही है।
आय और संपत्ति के अंतर की पड़ताल
लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश पर एसपी राजेश सहाय के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। जांच का उद्देश्य ठाकुर की ज्ञात आय और अर्जित संपत्तियों के बीच अंतर का पता लगाना है। शुरुआती गणना के अनुसार, करीब 20 साल के सेवाकाल में उनका कुल वेतन लगभग 65 लाख रुपये रहा, जबकि संपत्तियों पर खर्च दो करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपये से अधिक पाया गया।
सोडपुर में 2400 वर्गफीट क्षेत्र में बना दो मंजिला मकान जांच के प्रमुख केंद्रों में है। इसकी अनुमानित लागत करीब 97 लाख रुपये बताई गई है। नालछा में मांडव रोड तिराहे पर 1350 वर्गफीट में बने व्यावसायिक भवन की कीमत लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई है।

इसके अलावा पत्नी के नाम पर मांडव में 2.526 हेक्टेयर कृषि भूमि मिली है, जिसकी अनुमानित कीमत 42 लाख रुपये है। सोडपुर में 0.645 हेक्टेयर जमीन की कीमत करीब आठ लाख रुपये बताई गई है। जांच के दौरान अन्य भवनों और कृषि उपकरणों की जानकारी भी सामने आई है, जिनका मूल्यांकन किया जा रहा है।
वाहनों और मशीनों पर करीब 53 लाख रुपये खर्च
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जेसीबी, महिंद्रा ट्रैक्टर, महिंद्रा टीयूवी, ऑल्टो कार, बुलेट मोटरसाइकिल और आधुनिक कृषि यंत्रों पर करीब 53 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। जांच अधिकारी इनकी खरीद में इस्तेमाल रकम और भुगतान के स्रोत का पता लगा रहे हैं। कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के स्वामित्व की भी पुष्टि की जा रही है।
कुछ संपत्तियों के बेनामी होने की आशंका के चलते उनके दस्तावेज और वास्तविक उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों को ऐसी संपत्तियों के भी सुराग मिले हैं, जिनकी मालिकाना स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
बैंक खातों और जमीन की रजिस्ट्रियों की जांच
डीएसपी आनंद चौहान, टीआई आशुतोष मिठास, प्रतिभा तोमर और सचिन पटेरिया के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। बैंक खातों, लॉकरों, जमीन की रजिस्ट्रियों और संपत्तियों से जुड़े मूल दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। संपत्तियों की खरीद से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल जारी है।
मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। कार्रवाई अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद संपत्तियों के वास्तविक मूल्य और आय के मुकाबले अंतर की विस्तृत जानकारी सामने आएगी। अन्य संपत्तियों और बैंक खातों में जमा रकम की पुष्टि होने पर अनुपातहीन संपत्ति का आंकड़ा बढ़ने की संभावना है।















