नई दिल्ली, 05 नवंबर।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने लाल किला ब्लास्ट मामले से जुड़े अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया है। आरोपी ने कैंसर पीड़ित अपनी पत्नी के इलाज और देखभाल के लिए अंतरिम जमानत या कस्टडी पैरोल की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने इस पर कल यानी 6 नवंबर को अगली सुनवाई तय की है।
जावेद अहमद सिद्दीकी की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि उनकी पत्नी कैंसर के चौथे स्टेज से जूझ रही हैं और उनकी देखभाल के लिए उन्हें अंतरिम राहत दी जाए। वहीं ईडी ने इस याचिका का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपी के फरार होने का जोखिम है। इससे पहले जुलाई में उच्च न्यायालय और साकेत कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि मरीज की स्थिति स्थिर है और बालिग बच्चों से उनकी देखभाल की उम्मीद की जाती है।
जावेद अहमद सिद्दीकी को ईडी ने 18 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया था। लाल किला ब्लास्ट से जुड़े तीन संदिग्ध डॉक्टरों के संबंध फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आने के बाद यह संस्थान जांच एजेंसियों के रडार पर आया था। इसके बाद ईडी ने टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी तफ्तीश शुरू की थी।
ईडी ने इस मामले में 16 जनवरी को जावेद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज दो प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने जांच आगे बढ़ाई थी, जिसमें आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने एनएएसी की झूठी मान्यता की जानकारी दी थी। ईडी ने यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को भी अस्थाई रूप से जब्त कर लिया है।
उल्लेखनीय है कि 10 नवंबर 2025 को लाल किले के समीप आमिर रशीद अली के नाम दर्ज आई-10 कार में हुए भीषण विस्फोट में 13 लोगों की जान चली गई थी और 32 अन्य घायल हुए थे। यूजीसी की शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज कर सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था।












