नई दिल्ली, 5 नवंबर।
साइबर अपराधियों ने अब भारतीय वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने के लिए खतरनाक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) और सीईआरटी-इन ने देश के सभी बैंकों, एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियों को हाई-अलर्ट पर रहने की सख्त चेतावनी दी है।
जांच में खुलासा हुआ है कि शातिर हैकर्स कमजोर और बिना अपडेट वाले सर्वर में सेंधमारी कर सीधे पेमेंट सिस्टम व एपीआई को अपना निशाना बना रहे हैं। एआई की ताकत से ये हमले पलक झपकते ही अंजाम दिए जाते हैं, जिससे सिस्टम को भारी चपत लग रही है और करोड़ों रुपये अवैध रूप से निकाले जा रहे हैं।
ठगी की इस रकम को छिपाने के लिए अपराधी इसे कई फर्जी म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर देते हैं। इसके बाद फौरन आईएमपीएस या एनईएफटी के जरिए पैसों की निकासी कर ली जाती है, ताकि वे आसानी से पुलिस और जांच एजेंसियों की पकड़ से बच सकें।
सुरक्षा एजेंसियों ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी साइबर सेंधमारी की सूचना छह घंटे के भीतर सीईआरटी-इन और आरबीआई के दक्ष पोर्टल पर देनी होगी। साथ ही, वित्तीय संस्थानों को अपनी सभी पुरानी और बेकार हो चुकी एपीआई तुरंत बंद करने के सख्त आदेश दिए गए हैं।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि हर एक लेनदेन की दैनिक सीमा तय की जाए और ग्राहक के खाते का सत्यापन पुख्ता किया जाए। डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।












