मुंबई, 05 नवंबर।
निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' ने बड़े पर्दे पर इस महान महाकाव्य को एक बिल्कुल नए और भव्य रूप में पेश किया है। भारतीय भावनाओं से जुड़ी इस कहानी को आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल्स के साथ इस तरह गढ़ा गया है कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी यह फिल्म धर्म, प्रेम, त्याग और अहंकार की लड़ाई को बेहतरीन सिनेमाई स्तर पर दर्शाती है।
फिल्म की कहानी महर्षि वाल्मीकि के ग्रंथ पर आधारित है, जिसकी शुरुआत देवताओं और असुरों के संघर्ष तथा लंका में रावण के उदय से होती है। यश द्वारा निभाए गए रावण के किरदार में अपार शक्ति और तीनों लोकों पर राज करने की महत्वाकांक्षा साफ झलकती है। इसके बाद कहानी अयोध्या का रुख करती है, जहां भगवान राम का जन्म होता है और बाल्यकाल, शिक्षा तथा ताड़का वध से लेकर मिथिला में सीता स्वयंवर तक के प्रसंग खूबसूरती से आगे बढ़ते हैं।
कथा में उस समय बड़ा मोड़ आता है जब रानी कैकेयी अपने वधचनों के मुताबिक भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए 14 साल का वनवास मांगती हैं। पिता के वचनों का मान रखते हुए राम, सीता और लक्ष्मण के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं। दूसरी ओर लंका में रावण द्वारा सीता हरण की घटना के साथ फिल्म का पहला भाग समाप्त होता है, जो आगे आने वाले भीषण राम-रावण युद्ध की मजबूत पृष्ठभूमि तैयार करता है।
निर्देशन के मोर्चे पर नितेश तिवारी ने कमाल का काम किया है। रामायण की कहानी से हर कोई वाकिफ है, इसलिए निर्देशक ने इसकी मूल आत्मा से बिना छेड़छाड़ किए इसे एक आधुनिक और नया रूप दिया है। उन्होंने केवल भव्य सेटों या वीएफएक्स पर निर्भर रहने के बजाय पारिवारिक रिश्तों, भाईचारे और भावनाओं को भी पर्दे पर बखूबी जगह दी है, जिससे फिल्म का भावनात्मक पक्ष काफी मजबूत बन गया है।
फिल्म का तकनीकी पहलू इसकी सबसे बड़ी ताकत है। अयोध्या, मिथिला और लंका के महलों की भव्यता के साथ-साथ सिनेमैटोग्राफी लाजवाब है। डीएनईजी के विजुअल इफेक्ट्स और जटायु-रावण के संघर्ष के दृश्य बहुत प्रभावी हैं। इसके अलावा एआर रहमान और हैंस जिमर का संगीत फिल्म के पौराणिक और भावनात्मक माहौल में चार चांद लगा देता है, जो दर्शकों को स्क्रीन से बांधे रखता है।
अभिनय के मामले में रणबीर कपूर ने भगवान राम की भूमिका को अत्यंत शालीनता और संयम से निभाया है। उनके चेहरे की शांति और संवादों की गंभीरता किरदार पर पूरी तरह फिट बैठती है। वहीं यश ने रावण के अहंकार और उसकी धाकड़ स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का दिल जीत लिया है। साई पल्लवी ने सीता के किरदार को सादगी और गरिमा के साथ जिया है, जबकि रवि दुबे, रकुल प्रीत सिंह और लारा दत्ता सहित अन्य कलाकारों ने भी अपने किरदारों में पूरा न्याय किया है।
कुल मिलाकर, नितेश तिवारी की 'रामायण' एक ऐसा शानदार सिनेमाई अनुभव है जिसे बड़े पर्दे पर जरूर देखना चाहिए। फिल्म की लंबाई थोड़ी अधिक है और कुछ जगहों पर सीजीआई में सुधार की गुंजाइश है, लेकिन इसकी भव्यता और कलाकारों का दमदार अभिनय इन कमियों को पूरी तरह ढक लेता है। नई पीढ़ी के लिए यह महाकाव्य से जुड़ने का एक बेहतरीन माध्यम है।











