नई दिल्ली, 5 नवंबर।
उच्चतम न्यायालय ने तिरुपति लड्डू घी मिलावट प्रकरण से जुड़ी सुनवाई को आंध्र प्रदेश से अन्यत्र ट्रांसफर करने की मांग करने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने महाराष्ट्र के मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स के प्रबंध निदेशक मछिंद्र शांताराम लंके द्वारा दाखिल की गई अर्जी पर यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने राज्य में राजनीतिक बयानों के कारण निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होने की आशंका जताई थी, जिस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी तरह की दिक्कत आती है तो उनका न्यायालय हमेशा विकल्प के रूप में उपलब्ध है और पहले ही सख्त आदेशों से अनावश्यक बयानों पर रोक लगाई जा चुकी है।
यह विवाद पिछले साल अक्टूबर 2024 में तब गहराया था जब तिरुपति के प्रसिद्ध प्रसादम में पशु चर्बी के इस्तेमाल के आरोप लगे थे, जिसकी जांच के लिए सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय एजेंसी और राज्य पुलिस के चुनिंदा अधिकारियों की एक विशेष पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। न्यायालय ने अपनी पिछली टिप्पणियों में भी यह साफ कर दिया था कि इस संवेदनशील धार्मिक और सामाजिक मुद्दे पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है, इसलिए न्यायिक मंच को राजनीतिक अखाड़े में तब्दील करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी कानूनी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि के बीच शीर्ष अदालत ने मामले को राज्य से बाहर भेजने से इनकार करते हुए मौजूदा जांच प्रक्रिया पर अपना भरोसा बरकरार रखा है।












