30 मार्च 2026, भोपालदेशभर में कचरा प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। उच्चतम न्यायालय के 19 फरवरी के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल से ऐसे सभी संस्थानों को अपने स्तर पर कचरे का निपटान करना अनिवार्य होगा, जहां प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा उत्पन्न होता है।
नए प्रावधानों के तहत मॉल, बड़े होटल, रेस्टोरेंट, रिसोर्ट, कार्यालय परिसर, अस्पताल, नर्सिंग होम, मेडिकल कॉलेज, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, छात्रावास, हाउसिंग सोसायटी, सरकारी आवासीय परिसर, धार्मिक स्थल, स्टेडियम, बड़े आयोजन स्थल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे संस्थानों को कचरे का निपटान उसी स्थान पर करना होगा, जहां वह उत्पन्न होता है।
नियमों के अनुसार कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करना अनिवार्य होगा। इसके बाद संबंधित संस्थान या तो स्वयं निपटान की व्यवस्था करेंगे या किसी पंजीकृत एजेंसी को सौंपकर प्रमाण प्राप्त करेंगे। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है।
हालांकि, इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय निकायों के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। भोपाल में अभी भी कई इलाकों में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ नहीं है। शहर की सब्जी मंडियों और बड़े आयोजन स्थलों से निकलने वाले कचरे के निपटान की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए प्रशासन को सख्ती के साथ-साथ संसाधनों और ढांचे को मजबूत करना होगा, ताकि शहरों में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की स्थिति में सुधार लाया जा सके।












