हरिद्वार, 19 अप्रैल।
हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर कठोर रुख अपनाते हुए स्पष्ट घोषणा की कि राज्य के सभी मदरसों में अब उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद का निर्धारित पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जो संस्थान इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि मदरसा बोर्ड को शीघ्र ही भंग कर एक नया प्राधिकरण लागू किया जाएगा। इसके बाद राज्य में संचालित सभी मदरसों के लिए इस प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य होगा, साथ ही उन्हें राज्य बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करनी होगी।
उन्होंने आगे बताया कि एक जुलाई 2026 से पूरे राज्य में यह नया पाठ्यक्रम लागू कर दिया जाएगा और जो मदरसे इसे नहीं अपनाएंगे, उनके संचालन पर रोक लगा दी जाएगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी विद्यार्थियों को समान, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
चारधाम यात्रा को लेकर उन्होंने बताया कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है।
सरकार के अनुसार राज्य में मदरसा बोर्ड भंग करने का निर्णय सभी जिलों में लागू होगा और संस्थानों को नए शिक्षा बोर्ड के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा, जिसे संत समाज का भी समर्थन मिला है।










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