रांची, 26 मार्च।
राज्य के सरकारी अस्पतालों, सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में बर्न यूनिट उपलब्ध कराने को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में गुरुवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया।
सरकार ने अदालत को बताया कि राज्य के सभी जिलों में सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में बर्न यूनिट की व्यवस्था कर दी गई है। बर्न यूनिट के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है और इसे बेहतर बनाने के लिए मॉनिटरिंग की जा रही है। इनमें समुचित चिकित्सक भी मौजूद हैं।
वहीं एमिकस क्यूरी एवं अधिवक्ता दीक्षा द्विवेदी ने अदालत को बताया कि कुछ सरकारी अस्पतालों में बर्न यूनिट के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, जिसे शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी ने राज्य के सभी सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में बर्न यूनिट चालू करने का आग्रह किया था। पूर्व की सुनवाई में सरकार ने बर्न यूनिट संबंधी एक चार्ट संलग्न किया था, जिस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया यह चार्ट दिखाता है कि राज्य के 24 जिलों में से केवल चार जिलों में बर्न वार्ड की सुविधाएं संतोषजनक हैं। शेष जिलों के संबंध में केवल सूची संलग्न है, जबकि वास्तविक शपथपत्र संलग्न नहीं था। इससे संदेह उत्पन्न होता है कि बर्न वार्ड की सुविधाएं वास्तव में उपलब्ध नहीं हैं।
अदालत ने कहा था कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक बर्न वार्ड होना चाहिए और वह उचित रूप से सुसज्जित होना चाहिए, अन्यथा यह केवल कागजों में ही बर्न वार्ड बनकर रह जाएगा।
अदालत ने झारखंड के निदेशक-प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाओं को निर्देश दिया कि वे प्रत्येक जिले में बर्न वार्ड की वास्तविक स्थिति का विस्तृत शपथपत्र दाखिल करें, जिसमें सच्ची और स्पष्ट जानकारी हो।












