अगोया, 29 सितंबर।
भारतीय निशानेबाज नीरू ढांडा ने एशियाई खेलों में देश का नाम रोशन करते हुए महिला व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। इस शानदार जीत के साथ उन्होंने नागौर खेलों में भारत की झोली में पांचवां स्वर्ण पदक डाल दिया है।
मुकाबले के दौरान बारिश का माहौल होने के बावजूद नीरू ने गजब का मानसिक संयम दिखाया और क्वालिफिकेशन के साथ फाइनल मुकाबले में भी शीर्ष स्थान हासिल किया। चीन की सुन युनोंग और कुवैत की हाजर अब्दुलमलिक ने इक्कीस-इक्कीस अंक प्राप्त किए, जबकि कतर की रे बासिल सोलह अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहीं।
शुरुआती दौर में ही नीरू ने अपने सभी पांचों निशानों को अचूक तरीके से भेदकर धमाकेदार शुरुआत की। हालांकि दूसरे दौर में उनका एक निशाना चूक गया था, लेकिन उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए खेल के अंतिम चरणों में बेहतरीन लय पकड़ी।
तीसरे चरण में उन्होंने शत-प्रतिशत सटीक निशाना लगाकर एक बार फिर बढ़त हासिल कर ली। शुरुआती चार चरणों के बाद उनके बीस में से उन्नीस निशाने बिल्कुल सटीक बैठ चुके थे।
पच्चीस शॉट पूरे होने के बाद नीरू तेईस अंकों के साथ आगे चल रही थीं, जबकि सुन और हाजर इक्कीस अंकों पर थीं। इसके बाद निर्णायक क्षणों में भी भारतीय निशानेबाज ने अपना दबाव बनाए रखा और अंततः सोने का तमगा पक्का कर लिया।
यह स्वर्ण पदक नीरू के लिए एक यादगार और बेहद सफल साल की एक और बड़ी उपलब्धि है। इससे पहले उन्होंने जुलाई में इटली के लोनाटो में अपना पहला आईएसएसएफ विश्व कप स्वर्ण पदक भी जीता था।
भारतीय सेना की मार्कशीट यूनिट से जुड़ी और नायब सूबेदार के पद पर तैनात इस खिलाड़ी ने एशियाई चैंपियनशिप का खिताब जीतने के बाद अब एशियाई खेलों का स्वर्ण भी अपने नाम कर लिया है। इससे पहले टीम स्पर्धा में नीरू ने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर कुल तीन सौ अट्ठाईस अंकों के साथ रजत पदक जीता था।
व्यक्तिगत स्पर्धा के क्वालिफिकेशन दौर में नीरू ने बासिल के साथ संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया था, जिससे उन्हें खिताबी मुकाबले में बढ़त का फायदा मिला। इस व्यक्तिगत स्वर्ण के साथ भारत का कुल पदकों का आंकड़ा सैंतालीस पर पहुंच गया है, जिसमें पांच स्वर्ण, इक्कीस रजत और इक्कीस कांस्य पदक शामिल हैं।
शॉटगन शूटिंग में भारत के लिए इस तरह के बड़े मुकाबलों में पदक आना कम ही देखा गया है। ऐसे में नीरू की यह सफलता देश के इस खेल इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई है।
उन्होंने अपने चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण से प्रेरणा लेकर इस खेल में कदम रखा था। लक्ष्य ने जकार्ता में हुए दो हजार अट्ठारह के एशियाई खेलों की पुरुष ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीता था। इस प्रकार नीरू ने अपने भाई से एक कदम आगे बढ़कर एशियाई मंच पर स्वर्ण पदक हासिल करते हुए इतिहास रच दिया है।













