एक व्यक्ति रूहानी इत्र लेकर संत श्री हरिदास जी के पास बिहारी जी को भेंट करने आता है, पर संत ध्यान अवस्था में उसे आध्यात्मिक भाव से उपयोग करते हैं, जिसे वह व्यक्ति पहले गलत समझता है, लेकिन बाद में मंदिर में वही इत्र बिहारी जी पर देखकर उसे संत की आध्यात्मिक दृष्टि का वास्तविक अर्थ समझ आता है।
प्रेरक कहानियाँ ➔अंधा, लंगड़ा, निर्धन, मूर्ख और निर्बल व्यक्ति अपनी-अपनी कमियों को दूर होने पर समाजहित में कार्य करने की इच्छा व्यक्त करते हैं, लेकिन समय के साथ जब उन्हें वे सभी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं तो उनके विचार बदल जाते हैं और वे स्वार्थ में लीन हो जाते हैं, बाद में परिस्थितियाँ फिर पलटती हैं और वे पुनः अपनी पुरानी अवस्था में लौट आते हैं, जिससे उन्हें समय पर अच्छे कार्य न करने का पछतावा होता है।
प्रेरक कहानियाँ ➔एक व्यक्ति को मनहूस मानकर उसके खिलाफ शिकायत की जाती है, राजा स्वयं जांच करता है और गलत धारणा के आधार पर उसे मृत्युदंड देने का आदेश देता है, लेकिन मंत्री की समझदारी से यह स्पष्ट होता है कि असली मनहूसियत व्यक्ति में नहीं बल्कि सोचने के तरीके में होती है और राजा अपना निर्णय बदल देता है।
प्रेरक कहानियाँ ➔यह कथा समय और मानवीय स्वभाव का गहरा पाठ देती है। इसमें अन्धा, लंगड़ा, निर्धन, मूर्ख और निर्बल व्यक्ति अपनी कमियों के कारण सोचते हैं कि यदि उन्हें शक्ति, धन, विद्या या स्वास्थ्य मिलता तो वे दूसरों की भलाई के लिए काम करते। समय ने उन्हें वह सब दे दिया, लेकिन वे अपने स्वार्थ में लीन हो गए और अपने पूर्व के परोपकारी संकल्प भूल गए। अंततः सबकुछ पूर्ववत लौट आया और उन्हें पछतावा हुआ। कहानी हमें यह संदेश देती है कि हमारे पास जो कुछ भी है—स्वास्थ्य, शक्ति, विद्या या धन—उसका सही उपयोग समाज और जरूरतमंदों की भलाई में करना चाहिए, क्योंकि वास्तविक सुख और मूल्य दूसरों की सेवा में निहित है।
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जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। कामकाज की अधिकता रहेगी। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताएं भी बढ़ेंगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। शुभांक-7-8-9