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प्रेरक कहानियाँ
27 Apr, 2026

लालच ने छीनी शांति

एक धनी सेठ और एक गरीब मोची के बीच घटित प्रसंग में भजन की शक्ति से सेठ के स्वास्थ्य में सुधार आता है, लेकिन धन प्राप्त होने के बाद मोची लालच में फँसकर अपनी मानसिक शांति और कामकाज दोनों खो देता है।

एक गाँव में एक धनी सेठ रहता था। उसके भव्य बंगले के पास एक जूते सिलने वाला गरीब मोची अपनी छोटी सी दुकान चलाता था। मोची की आदत थी कि वह जूते सिलते समय हमेशा भगवान के भजन गुनगुनाता रहता था, लेकिन सेठ ने कभी उसकी ओर ध्यान नहीं दिया।

एक बार सेठ व्यापार के सिलसिले में विदेश गया, जहाँ उसकी तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई। उसके पास धन की कोई कमी नहीं थी, इसलिए उसने देश-विदेश से डॉक्टर, वैद्य और हकीम बुलवाए, लेकिन कोई भी उसकी बीमारी का उपचार नहीं कर सका। समय के साथ उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और वह बिस्तर से उठ भी नहीं पाता था।

एक दिन वह अपने घर में लेटा हुआ था, तभी उसे मोची के भजन सुनाई दिए। उस दिन वे भजन उसे पहले से अधिक मधुर लगे। धीरे-धीरे वह उन भजनों में इतना डूब गया कि उसे ऐसा महसूस होने लगा जैसे वह परमात्मा से साक्षात्कार कर रहा हो। कुछ समय के लिए वह अपनी बीमारी को भी भूल गया और उसे गहन शांति और आनंद की अनुभूति हुई।

कुछ दिनों तक यही क्रम चलता रहा और सेठ के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। एक दिन उसने मोची को बुलाकर 1000 रुपये इनाम में दिए, जिससे मोची प्रसन्न होकर वापस चला गया।

लेकिन उस रात मोची को नींद नहीं आई। वह पूरी रात इस चिंता में रहा कि इतने पैसे कहाँ रखे जाएँ और उनसे क्या-क्या खरीदा जाए। इसी लालच में वह इतना बेचैन हो गया कि अगले दिन काम पर भी नहीं जा सका। धीरे-धीरे उसका मन भजनों से हटने लगा और वह केवल धन के बारे में सोचने लगा।

अब वह नियमित रूप से दुकान भी नहीं खोलता था और उसका काम ठप पड़ने लगा। दूसरी ओर सेठ की तबीयत फिर से बिगड़ने लगी।

कुछ समय बाद मोची स्वयं सेठ के घर आया और बोला कि वह पैसे वापस ले ले, क्योंकि उस धन के कारण उसका काम चौपट हो गया है और वह भजन गाना भी भूल गया है। धन ने उसे उसके सच्चे मार्ग से भटका दिया था। यह कहकर उसने पैसे लौटा दिए और फिर से अपने काम और भजनों में लग गया।

यह कथा बताती है कि लालच मनुष्य को उसकी शांति और सच्चे मार्ग से दूर कर देता है तथा सच्चा सुख भौतिक धन में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और भक्ति में होता है।

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