देहरादून, 12 जून।
भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए आज अत्यंत दुखद दिन है। दिग्गज निशानेबाज और प्रख्यात कोच जसपाल राणा का निधन हो गया है। कुछ समय पूर्व उन्हें हृदयघात हुआ था, जिसके बाद से वे दिल्ली के एक अस्पताल में उपचाररत थे। उनके निधन की सूचना ने पूरे खेल जगत और उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ा दी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने जसपाल राणा को 'देवभूमि का सपूत' बताते हुए कहा कि पद्मश्री से अलंकृत निशानेबाज का आकस्मिक जाना देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि निशानेबाजी के क्षेत्र में राणा का योगदान और युवा खिलाड़ियों को दी गई प्रेरणा सदैव स्मरणीय रहेगी।
28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जन्मे जसपाल राणा ने 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। महज 18 वर्ष की आयु में मिली इस उपलब्धि के बाद उन्हें भारतीय शूटिंग टीम का ‘मशाल वाहक’ कहा जाने लगा। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों और SAIF खेलों में स्वर्ण पदकों की झड़ी लगाकर कई रिकॉर्ड अपने नाम किए।
उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्म श्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खिलाड़ी के रूप में सफलता के बाद, उन्होंने एक कुशल कोच के रूप में भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। उनके मार्गदर्शन में सौरभ चौधरी, अनीस भनवाला और ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर जैसे प्रतिभावान निशानेबाज तैयार हुए। 2024 के पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर के ऐतिहासिक प्रदर्शन में राणा की कोचिंग का अहम योगदान रहा था। राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में नियुक्त किया था। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने अपना एक स्तंभ खो दिया है।









