नई दिल्ली, 12 जून।
फीफा विश्व कप 2026 में इंग्लैंड की टीम एक बार फिर उस गौरवमयी खिताब को जीतने के इरादे से मैदान में उतरेगी, जिसका इंतजार उसे 1966 के बाद से है। हर बार की तरह इस बार भी टीम में प्रतिभावान खिलाड़ियों की भरमार है, मगर इस बार नेतृत्व में स्पष्ट अंतर नजर आता है। जर्मन कोच थॉमस ट्यूशेल के कुशल निर्देशन में टीम नई सोच और ठोस रणनीति के साथ अपना अभियान शुरू करने को तैयार है।
इंग्लैंड का फीफा विश्व कप में पहला मुकाबला 18 जून को क्रोएशिया के खिलाफ निर्धारित है। शुरुआत में ट्यूशेल की नियुक्ति को लेकर काफी चर्चा और आलोचना हुई थी, लेकिन उनके नेतृत्व में टीम ने विश्व कप क्वालीफायर के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इंग्लैंड ने क्वालीफायर के आठ मुकाबलों में जीत दर्ज की और पूरे अभियान में विरोधी टीम को एक भी गोल करने का मौका नहीं दिया, जिसने खिलाड़ियों का मनोबल काफी ऊपर किया है।
इस बार इंग्लैंड का संतुलित आक्रमण उसकी सबसे बड़ी मजबूती बनकर उभरा है। कप्तान हैरी केन टीम के मुख्य गोल स्कोरर की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि उनके साथ मार्कस रैशफोर्ड, बुकायो साका, एंथनी गॉर्डन और मॉर्गन रोजर्स जैसे तेज-तर्रार खिलाड़ी आक्रमण को और अधिक रचनात्मक बना रहे हैं। टीम की पूरी रणनीति केन की फिनिशिंग और उनके खेल निर्माण क्षमता के अधिकतम उपयोग पर टिकी है।
मिडफील्ड में डेक्लान राइस के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है, जिन्हें युवा इलियट एंडरसन का सहयोग मिलेगा, वहीं जूड बेलिंघम की मौजूदगी मिडफील्ड में संतुलन प्रदान करेगी। रक्षा पंक्ति इंग्लैंड की मुख्य चिंता बनी हुई है क्योंकि जॉन स्टोन्स और रीस जेम्स चोट की समस्याओं से जूझ रहे हैं और टीम के कई युवा खिलाड़ियों को बड़े टूर्नामेंट का अनुभव कम है। गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड टीम के लिए सबसे भरोसेमंद कड़ी साबित हो रहे हैं।
टीम के लिए विश्व कप की अलग-अलग परिस्थितियां भी बड़ी परीक्षा साबित होंगी। विशेषकर ऊंचाई वाले मैदान और भीषण गर्मी का सामना करना टीम के लिए निर्णायक होगा। टीम के कोच ट्यूशेल क्लब स्तर पर कई बड़े खिताब जीत चुके हैं और इंग्लैंड को उम्मीद है कि उनका अनुभव नॉकआउट चरण में टीम को मजबूती प्रदान करेगा।










