प्रेरक कहानियाँ
25 Apr, 2026

इच्छाएँ और संतुष्टि

इच्छाएं कभी खत्म नहीं होतीं, और जब एक पूरी होती है तो दूसरी सामने आती है। जीवन में संतुष्टि पाने के लिए हमें जो है, उसी में खुश रहना चाहिए।

एक सिद्ध महात्मा से मिलने पहुंचे एक गरीब दम्पत्ति ने देखा कि कूड़े के ढेर पर सोने का एक चिराग पड़ा हुआ था। दम्पत्ति ने महात्मा से पूछा, तो महात्मा ने बताया कि यह तीन इच्छाएं पूरी करने वाला एक बेकार चिराग है, जो बहुत खतरनाक भी है। जो इसे उठाकर ले जाता है, वह अंत में इसे वापस यहीं कूड़े में फेंक देता है।

गरीब दम्पत्ति ने सोचा और चिराग को उठाकर घर ले आए। घर पहुंचकर, उन्होंने चिराग से तीन वरदान मांगने का निर्णय लिया। सबसे पहले, उन्होंने दस लाख रुपये मांगे, क्योंकि वे गरीब थे और उन्हें पैसों की जरूरत थी।

जैसे ही उन्होंने रुपये मांगे, दरवाजे पर दस्तक हुई। दरवाजा खोलने पर एक आदमी रुपये से भरा बैग और एक लिफाफा थमाकर चला गया। लिफाफे में एक पत्र था, जिसमें लिखा था, "मेरी कार से टकराकर आपके पुत्र की मृत्यु हो गई थी। पश्चाताप स्वरूप यह दस लाख रुपये भेज रहा हूं, कृपया मुझे माफ कर दीजिए।"

यह पढ़कर दम्पत्ति के होश उड़ गए। पत्नी जोर-जोर से रोने लगी। तभी पति को ख्याल आया और उसने चिराग से दूसरी इच्छा मांगी कि उनका बेटा वापस आ जाए।

थोड़ी देर बाद दरवाजे पर फिर दस्तक हुई। घर में अजीब सी आवाजें आने लगीं, और बल्ब जलने-बुझने लगे। उनका बेटा प्रेत बनकर वापस आ गया। दम्पत्ति को उसका रूप देखकर बहुत डर लगा और घबराहट में उन्होंने तीसरी इच्छा के रूप में अपने बेटे की मुक्ति मांगी।

बेटे की मुक्ति के बाद, दम्पत्ति रातों-रात आश्रम पहुंचे और चिराग को कूड़े के ढेर पर फेंक दिया, फिर दुखी मन से वापस लौट आए।

मित्रों, हम सभी अपनी ज़िंदगी में उस दम्पत्ति की तरह हैं। हमारी इच्छाएं बेहिसाब होती हैं। जब एक इच्छा पूरी होती है, तो दूसरी सताने लगती है और फिर तीसरी सामने आ जाती है। इसीलिए, हमें जो भी ईश्वर ने दिया है, उसमें संतुष्ट रहना चाहिए।

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