भोपाल, 12 जून।
मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मचारी कल्याण की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए राज्य एवं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में कार्यरत 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का दर्जा देने की अनुमति प्रदान की है। इस निर्णय से लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा और शासकीय लाभों का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में लिया गया है, जिसमें खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस पहल से वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को स्थायित्व और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, इनमें 29 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तथा 5 ऑफिस मोहर्रिर-सह-डिस्पेचर पदों पर कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शामिल हैं। विभाग द्वारा इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
सरकारी निर्देशों के अनुसार 16 मई 2007 के बाद नियुक्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का दर्जा देने के लिए विशेष अनुमति आवश्यक थी। राज्य सरकार ने इस मामले को विशेष परिस्थितियों के तहत वन टाइम रिलेक्सेशन प्रदान करते हुए यह निर्णय लिया है।
यह प्रस्ताव 9 जून 2026 को मंत्रि-परिषद की बैठक में स्वीकृत किया गया था, जिसके बाद विभागीय स्तर पर सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूर्ण कर आदेश जारी किए गए।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि इस निर्णय से कर्मचारियों को न केवल सेवा सुरक्षा मिलेगी बल्कि नियमानुसार वेतन निर्धारण, वित्तीय लाभ और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का भी लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने इसे सरकार की कर्मचारी हितैषी और संवेदनशील नीति का उदाहरण बताया।
इस फैसले से कर्मचारियों और उनके परिवारों में संतोष का माहौल है। माना जा रहा है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे।













