नई दिल्ली, 12 जून।
भारतीय सेना की मारक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम के तहत स्वदेशी रक्षा कंपनी एसएमपीपी ने सेना को 106 टर्बोजेट इंजन आधारित कामिकाजे ड्रोन सौंपे हैं, जिन्हें ‘पीसकीपर अग्निवेग’ नाम दिया गया है।
जानकारी के अनुसार इन ड्रोन की मारक दूरी करीब 180 किलोमीटर तक है और यह 450 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ने में सक्षम हैं। यह गति दुनिया के सबसे तेज उड़ने वाले पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन (लगभग 320 किलोमीटर प्रति घंटा) से भी अधिक बताई गई है।
कंपनी के मुताबिक इन प्रणालियों पर जैमिंग और स्पूफिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक बाधाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जिससे ये अपने लक्ष्य से भटकते नहीं हैं। इनमें से 100 ड्रोन ऑपरेशनल उपयोग के लिए और 6 ड्रोन प्रशिक्षण के लिए सेना को दिए गए हैं।
इन ड्रोन को बेलारूस की एक कंपनी के सहयोग से विकसित किया गया है और ये पूरी तरह स्वचालित सटीक हमले करने में सक्षम हैं। लक्ष्य निर्धारित होने के बाद ये बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के मिशन पूरा कर सकते हैं।
कामिकाजे ड्रोन ऐसे मानवरहित हवाई हथियार होते हैं जो लक्ष्य से टकराकर स्वयं नष्ट हो जाते हैं और इन्हें लॉइटरिंग म्यूनिशन भी कहा जाता है। इनका उपयोग टैंक, रडार, तोप और सैन्य ठिकानों को कम लागत में सटीक रूप से निशाना बनाने के लिए किया जाता है।
परीक्षणों के दौरान इन ड्रोन ने जामिंग और स्पूफिंग वाले वातावरण में पांच मीटर से कम सर्कुलर त्रुटि हासिल की, जिससे लक्ष्य के अत्यंत निकट जाकर सटीक प्रहार की क्षमता साबित हुई।
कंपनी के सीईओ आशीष कंसल ने बताया कि छह महीने में यह आपूर्ति एक बड़ी उपलब्धि है और इनमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि इनका उन्नत संस्करण विकसित करने पर भी काम जारी है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगा।












