भोपाल, 11 जून।
मध्यप्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (SEIAA) के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव को एक पत्र भेजकर पर्यावरण स्वीकृतियों से जुड़े मामलों में कुछ प्रक्रियागत अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का उल्लेख किया है। पत्र में यह कहा गया है कि प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर संबंधित प्रकरणों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन में कुछ मामलों में प्रक्रियागत विचलन होने की आशंका जताई गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कुछ प्रकरणों में पर्यावरण स्वीकृतियां और टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए जाने से संबंधित प्रक्रियाओं पर प्रश्न उठे हैं।
SEIAA अध्यक्ष ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि कुछ मामलों में सदस्य सचिव स्तर पर नियमित बैठकों के अभाव के बावजूद प्रकरणों के निस्तारण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, इससे पर्यावरण स्वीकृति प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर प्रश्न उठते हैं।
पत्र में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के कुछ आदेशों का संदर्भ देते हुए यह भी कहा गया है कि कुछ पर्यावरण स्वीकृतियों को शून्य घोषित किए जाने से संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई और अनुपालन पर ध्यान अपेक्षित है। साथ ही कथित रूप से बिना पूर्ण मूल्यांकन प्रक्रिया के जारी किए गए स्वीकृति आदेशों की समीक्षा की आवश्यकता बताई गई है।
SEIAA अध्यक्ष ने पत्र के माध्यम से अनुरोध किया है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि तथ्यों की स्पष्टता सुनिश्चित हो सके और जिम्मेदारी निर्धारित की जा सके। साथ ही यदि किसी स्तर पर प्रक्रियागत अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
जानकारी के अनुसार, कथित रूप से 237 पर्यावरण स्वीकृतियों से जुड़े मामलों का उल्लेख भी पत्र में किया गया है, जो वर्तमान में विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन बताए जाते हैं। इस पत्र के बाद प्रशासनिक और पर्यावरणीय हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि इन सभी विषयों पर आधिकारिक जांच और पुष्टि की प्रक्रिया जारी रह सकती है।











