भोपाल, 11 जून।
भोपाल स्थित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में शैक्षणिक, प्रशासनिक और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। संगठन ने विश्वविद्यालय में कथित अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 52 लागू करने तथा कुलपति के इस्तीफे की मांग उठाई है।
धरने पर बैठे परिषद पदाधिकारियों का कहना है कि मांगों पर प्रभावी कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा। विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
एबीवीपी के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय वर्तमान में केवल 34 नियमित शिक्षकों के सहारे संचालित हो रहा है, जबकि विभिन्न विभागों में 105 शिक्षकों की आवश्यकता है। उनका कहना है कि लंबे समय से रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। परिषद ने हाल में जारी भर्ती विज्ञापन के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर भी सवाल उठाए हैं।
संगठन ने परीक्षा परिणामों में हो रही देरी को भी गंभीर मुद्दा बताया है। परिषद के अनुसार एमबीए प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाएं जनवरी में आयोजित हुई थीं, लेकिन अब तक परिणाम घोषित नहीं किए गए हैं। अन्य पाठ्यक्रमों के नतीजों में भी विलंब की शिकायत सामने आई है। परिषद का कहना है कि इससे विद्यार्थियों को प्रवेश, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एबीवीपी ने विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया पर भी चिंता व्यक्त की है। संगठन का दावा है कि इस वर्ष प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी देखी जा रही है। परिषद के अनुसार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी और पारदर्शिता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। साथ ही समय पर एनओसी जारी नहीं होने से व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की काउंसिलिंग प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।
धरने में शामिल छात्राओं ने छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई हॉस्टलों में सीसीटीवी कैमरों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और परिसर के कुछ हिस्सों में रोशनी की कमी बनी हुई है। कई कमरों की खिड़कियों में जालियां नहीं होने से सांप और अन्य जीव-जंतुओं के आने का खतरा बना रहता है।
एबीवीपी के मध्य भारत राज्य शासकीय विश्वविद्यालय संयोजक दिवाकर शुक्ला ने विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र और पेयजल सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र अक्सर बंद रहता है और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता भी नहीं रहती। संगठन ने परिसर में शुद्ध पेयजल व्यवस्था और खराब पड़े वाटर कूलरों का मुद्दा भी उठाया।
परिषद ने विश्वविद्यालय की नैक मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। संगठन का कहना है कि शिक्षकों की कमी, लंबित परिणामों और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के बावजूद उच्च ग्रेड मिलना मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर प्रश्न खड़े करता है।
एबीवीपी ने आर्थिक और प्रशासनिक अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण निर्णय कार्य परिषद की स्वीकृति के बिना लिए जा रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
धरने और लगाए गए आरोपों को लेकर समाचार लिखे जाने तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।










