पटना, 11 जून।
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव और एक उपचुनाव में सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है। नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद गुरुवार को यह निर्वाचन प्रक्रिया पूरी हुई और सभी प्रत्याशियों की जीत तय हो गई।
इन चुनावों में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी संजय मयूख के पुनर्निर्वाचन ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। वहीं भोजपुरी सिनेमा के चर्चित गायक-अभिनेता पवन सिंह सहित एनडीए के सभी उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की। विपक्ष की ओर से राजद के सुनील सिंह भी निर्विरोध विधान परिषद के लिए चुने गए हैं।
विधान परिषद की नौ सीटें विधानसभा कोटे से और एक सीट उपचुनाव के माध्यम से भरी गई है। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। कुल 10 उम्मीदवारों ने ही नामांकन दाखिल किया था, जिसके चलते सभी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
नवनिर्वाचित सदस्यों में जनता दल (यूनाइटेड) से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद शामिल हैं। भाजपा से संजय मयूख, पवन सिंह, संजय प्रकाश, अनिल ठाकुर और शीला पंडित निर्वाचित हुए हैं। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से अशरफ अंसारी और राजद से सुनील सिंह विधान परिषद पहुंचे हैं।
इस बीच एनडीए सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को एक भी सीट न मिलने पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के नेता दीपक प्रकाश, जो वर्तमान में मंत्री हैं लेकिन किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, को लेकर संवैधानिक प्रावधानों के तहत छह माह में सदस्यता हासिल करने की अनिवार्यता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उधर, राजद में भी सुनील सिंह को दोबारा भेजे जाने के फैसले पर असंतोष सामने आया है। पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव और पुत्री रोहिणी आचार्या ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। वहीं पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने पदों से इस्तीफा दे दिया है, हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।









