प्रेरक कहानियाँ
16 Jun, 2026

धन मिला, पर चैन नहीं; सेवा से मिला जीवन का सच्चा सुख

गरीब व्यक्ति ने मंदिर में धन के लिए सेवा की और धनी बन गया, पर शांति खो दी। अंत में, उसने स्वार्थ त्यागकर निस्वार्थ सेवा चुनी, क्योंकि मन की शांति ही सच्ची उपलब्धि है।

एक गरीब आदमी था। वह हर रोज नजदीक के मंदिर में जाकर वहां साफ-सफाई करता और फिर अपने काम पर चला जाता था। अक्सर वह प्रभु से कहता कि मुझे आशीर्वाद दीजिए, ताकि मेरे पास ढेर सारा धन-दौलत आ जाए।

एक दिन ठाकुर जी बाल रूप में प्रकट हुए और उस आदमी से पूछ ही लिया कि क्या तुम मंदिर में केवल काम करने के उद्देश्य से ही आते हो?

उस आदमी ने पूरी ईमानदारी से कहा कि हां, मेरा उद्देश्य तो यही है कि मेरे पास ढेर सारा धन आ जाए, इसीलिए तो आपके दर्शन करने आता हूं। मैं पटरी पर सामान लगाकर बेचता हूं। पता नहीं, मेरे सुख के दिन कब आएंगे।

बाल रूप ठाकुर जी ने कहा—तुम चिंता मत करो। जब तुम्हारे सामने अवसर आएगा, तब ऊपर वाला तुम्हें आवाज नहीं लगाएगा। बस, चुपचाप तुम्हारे सामने अवसर खोलता जाएगा। वह युवक चला गया।

समय ने पलटा खाया और वह अधिक धन कमाने लगा। वह इतना व्यस्त हो गया कि मंदिर में जाना ही छूट गया। कई वर्षों बाद वह एक दिन सुबह मंदिर पहुंचा और साफ-सफाई करने लगा।

ठाकुर जी फिर प्रकट हुए और उस व्यक्ति से बड़े ही आश्चर्य से पूछा—क्या बात है, इतने बरसों बाद आए हो? सुना है तुम बहुत बड़े सेठ बन गए हो। वह व्यक्ति बोला—जी हां, बहुत धन कमाया है।

अच्छे घरों में बच्चों की शादियां की हैं, पैसे की कोई कमी नहीं है, पर दिल में चैन नहीं है। ऐसा लगता था कि रोज सेवा करने आता रहूं, पर आ न सका। व्यक्ति बोला—हे प्रभु, आपने मुझे सब कुछ दिया, पर जिंदगी का चैन नहीं दिया?

प्रभु जी ने कहा कि तुमने वह मांगा ही कब था? जो तुमने मांगा था, वह तो तुम्हें मिल गया न। फिर आज यहां क्या करने आए हो?

उसकी आंखों में आंसू भर आए, वह ठाकुर जी के चरणों में गिर पड़ा और बोला—अब कुछ मांगने के लिए सेवा नहीं करूंगा। बस दिल को शांति मिल जाए। ठाकुर जी ने कहा—पहले तय कर लो कि अब कुछ मांगने के लिए मंदिर की सेवा नहीं करोगे, बस मन की शांति के लिए ही आओगे।

ठाकुर जी ने समझाया कि चाहे मांगने से कुछ भी मिल जाए, पर दिल का चैन कभी नहीं मिलता; इसलिए सेवा के बदले कुछ मांगना नहीं चाहिए। वह व्यक्ति बड़ा ही उदास होकर ठाकुर जी को देखता रहा और बोला—मुझे अब कुछ नहीं चाहिए।

आप बस मुझे सेवा करने दीजिए। सच में, मन की शांति सबसे अनमोल है।

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