प्रेरक कहानियाँ
25 Apr, 2026

एक गिलास पानी की कीमत

यह कहानी सिकंदर के घमंड को चुनौती देती है, जहाँ एक साधु ने उसे यह सिखाया कि असली महानता जीवन के सच्चे मूल्यों में होती है, न कि बाहरी शक्ति या धन में।

जब सिकंदर भारत से लौट रहा था, तो उसने एक साधु से मिलने का निश्चय किया। जैसे ही सिकंदर साधु के पास पहुंचा, वह साधु हंसने लगा। यह देखकर सिकंदर को लगा कि साधु उसका अपमान कर रहा है।

सिकंदर ने गुस्से में आकर कहा, "या तो तुम मुझे पहचानते नहीं हो, या फिर तुम्हारी मौत आ गई है। क्या तुम नहीं जानते कि मैं कौन हूं? मैं महान सिकंदर हूं।"

साधु ने और जोर से हंसते हुए कहा, "मुझे तुम्हारी महानता में कुछ भी खास नहीं दिखाई देती। मैं तो तुम्हें एक साधारण और दरिद्र इंसान समझता हूं।"

सिकंदर ने हैरान होकर पूछा, "क्या तुम पागल हो गए हो? मैंने पूरी दुनिया जीत ली है।"

साधु शांत भाव से बोले, "तुम अभी भी एक सामान्य इंसान ही हो। मैं तुमसे एक सवाल पूछता हूं। मान लो, तुम किसी रेगिस्तान में फंस गए हो, जहां दूर-दूर तक पानी का कोई स्रोत नहीं है। तब तुम एक गिलास पानी के लिए क्या दोगे?"

सिकंदर थोड़ी देर सोचने के बाद बोला, "मैं अपने राज्य का आधा हिस्सा दे दूंगा।"

साधु ने फिर पूछा, "अगर वह आधा राज्य भी न मिले, तो क्या करोगे?"

सिकंदर ने उत्तर दिया, "तो मैं अपना पूरा राज्य दे दूंगा।"

यह सुनकर साधु मुस्कुराए और बोले, "तो फिर तेरा पूरा राज्य एक गिलास पानी के बराबर हुआ। और तू इसी पर घमंड करता है? वक्त आ जाए, तो एक गिलास पानी के लिए तेरा पूरा राज्य भी कम पड़ जाएगा। रेगिस्तान में तू चाहे जितना 'महान सिकंदर' चिल्लाए, कोई सुनने वाला नहीं होगा। तेरी महानता बस एक भ्रम है।"

शिक्षा:इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में किसी भी चीज का घमंड नहीं करना चाहिए। धन और शक्ति ही सब कुछ नहीं होते। अगर हमारे पास धन है, तो उसका सही उपयोग दूसरों की मदद करने में करना चाहिए। सच्चा सुख और संतोष तब मिलता है जब हम जरूरतमंदों की सहायता करते हैं।

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