23 मार्च
अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन दिल के दौरे, स्ट्रोक और मृत्यु के बढ़ते जोखिम से गहराई से जुड़ा पाया गया है। रोजाना सेवन में मामूली वृद्धि भी इस खतरे को धीरे-धीरे बढ़ा सकती है।
हालिया शोध में सामने आया है कि बड़ी मात्रा में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं की आशंका को काफी बढ़ा देता है। जिन लोगों ने प्रतिदिन नौ से अधिक सर्विंग का सेवन किया, उनमें प्रमुख हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम उन लोगों की तुलना में 67% अधिक पाया गया, जो लगभग एक सर्विंग तक सीमित रहे। इस श्रेणी में पैकेटबंद और आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थ जैसे चिप्स, क्रैकर्स, फ्रोजन भोजन, प्रोसेस्ड मांस, मीठे पेय, नाश्ते के सीरियल और ब्रेड शामिल हैं।

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सेवन बढ़ने के साथ बढ़ता खतरा
जैसे-जैसे इन खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ता है, वैसे-वैसे जोखिम भी लगातार बढ़ता जाता है। प्रत्येक अतिरिक्त दैनिक सर्विंग के साथ दिल के दौरे, स्ट्रोक या हृदय रोग से मृत्यु की संभावना में 5% से अधिक वृद्धि देखी गई। यह संबंध कुछ समूहों में अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया।
शोध से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही ये खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध और उपयोग में सुविधाजनक हों, लेकिन इनके सेवन को सीमित रखना आवश्यक है क्योंकि ये हृदय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
विविध जनसंख्या पर आधारित व्यापक अध्ययन
यह अध्ययन उन शुरुआती बड़े अध्ययनों में शामिल है, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि के वयस्कों में अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों और हृदय रोग के बीच संबंध का विश्लेषण किया गया। इसके निष्कर्ष पूर्व में किए गए अध्ययनों के अनुरूप हैं और व्यापक स्तर पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।
इसमें 45 से 84 वर्ष आयु वर्ग के 6,814 ऐसे व्यक्तियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिन्हें पहले से हृदय रोग नहीं था। प्रतिभागियों के भोजन संबंधी पैटर्न का आकलन प्रश्नावली के माध्यम से किया गया, जिससे यह पता लगाया गया कि वे प्रतिदिन कितनी मात्रा में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं।खाद्य पदार्थों को उनके प्रोसेसिंग स्तर के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया, जिसमें कम प्रोसेस्ड से लेकर अत्यधिक प्रोसेस्ड तक की श्रेणियां शामिल थीं।
जिन प्रतिभागियों का सेवन सबसे अधिक था, वे औसतन प्रतिदिन 9.3 सर्विंग लेते थे, जबकि सबसे कम सेवन करने वाले लगभग 1.1 सर्विंग तक सीमित थे। अधिक सेवन करने वाले समूह में हृदय रोग या स्ट्रोक से मृत्यु, या गैर-घातक हृदय घटनाओं का जोखिम 67% अधिक पाया गया।
कैलोरी और आहार गुणवत्ता से परे भी बना रहता है जोखिम
अध्ययन में कई महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखा गया, जिनमें दैनिक कैलोरी सेवन, आहार की गुणवत्ता तथा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मोटापा जैसी सामान्य स्थितियां शामिल थीं। इन सभी कारकों को नियंत्रित करने के बावजूद, अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने वालों में जोखिम लगभग समान रूप से अधिक बना रहा।
यह निष्कर्ष दर्शाता है कि केवल कैलोरी या आहार की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थों के प्रोसेस होने का तरीका भी हृदय संबंधी जोखिम में स्वतंत्र भूमिका निभा सकता है। इसलिए पोषण के साथ-साथ प्रोसेसिंग स्तर पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
जोखिम में असमानता और संभावित कारण
प्रत्येक अतिरिक्त दैनिक सर्विंग के साथ हृदय संबंधी प्रतिकूल घटनाओं का जोखिम 5.1% बढ़ा पाया गया। कुछ समूहों में यह वृद्धि अधिक रही, जहां प्रति सर्विंग जोखिम में 6.1% तक की वृद्धि देखी गई, जबकि अन्य समूहों में यह लगभग 3.2% रही।शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे कारणों में कुछ क्षेत्रों में कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की सीमित उपलब्धता और लक्षित विपणन जैसे कारक शामिल हो सकते हैं।

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अध्ययन की सीमाएं और संभावित जैविक प्रभाव
इस अध्ययन की कुछ सीमाएं भी रहीं। चूंकि यह विशेष रूप से अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के मापन के लिए तैयार नहीं किया गया था, इसलिए आंकड़े प्रतिभागियों द्वारा स्वयं दी गई जानकारी पर आधारित थे। इसके अलावा, सेवन को व्यक्तिगत खाद्य पदार्थों के बजाय सर्विंग के रूप में मापा गया।
हालांकि जैविक प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अध्ययन नहीं किया गया, लेकिन पूर्व शोध संकेत देते हैं कि ऐसे खाद्य पदार्थों में कैलोरी, अतिरिक्त शर्करा और वसा की मात्रा अधिक होती है, जो भूख और चयापचय को प्रभावित कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप वजन बढ़ना, सूजन और शरीर में वसा का जमाव बढ़ सकता है, जो हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाता है।
बेहतर खाद्य विकल्पों से जोखिम में कमी
जोखिम को कम करने के लिए भोजन के चयन के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। खाद्य पदार्थों के लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए, जहां प्रति सर्विंग चीनी, नमक, वसा और कार्बोहाइड्रेट की जानकारी दी होती है, जो अक्सर अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में अधिक होती है।
इसके विपरीत, कम प्रोसेस्ड विकल्प जैसे सादा ओटमील, मेवे, दालें तथा ताजे या जमे हुए फल और सब्जियां अधिक बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
हाल ही में एक क्लिनिकल मार्गदर्शन में यह भी सुझाव दिया गया कि पैकेजिंग के सामने स्पष्ट लेबलिंग प्रणाली अपनाई जाए, ताकि उपभोक्ताओं को स्वस्थ विकल्प आसानी से उपलब्ध और समझ में आ सकें।

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