नई दिल्ली, 06 अप्रैल।
केंद्रीय सरकार के ई-खरीद मंच, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM), ने वैश्विक निविदा भागीदारी और बहु-मुद्रा बोली लगाने की सुविधा शुरू कर दी है, जिससे यह मंच केवल घरेलू रुपये आधारित सिस्टम से निकलकर अधिक खुला और पारदर्शी खरीद प्लेटफॉर्म बन गया है।
ग्लोबल टेंडर एनक्वायरी की शुरुआत के साथ अब अंतरराष्ट्रीय विक्रेता सरकारी ठेकों के लिए बोली लगा सकते हैं, वहीं बहु-मुद्रा समर्थन भारतीय विक्रेताओं के बाहर भी भागीदारी को बढ़ा रहा है। यह कदम खास महत्व रखता है क्योंकि भारत के कई मुक्त व्यापार समझौते इस वर्ष लागू होने वाले हैं, जो सार्वजनिक खरीद में सीमा-पार सहभागिता बढ़ाने और बाजार पहुंच को मजबूत करने में मदद करेंगे।
साथ ही, GeM ने धोखाधड़ी और निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया है, ताकि खरीद प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे। प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग टूल्स का उपयोग कर संभावित अनियमितताओं जैसे कि खरीदार-विक्रेता साजिश, विक्रेताओं में सांठगांठ, नियमों से बचने के लिए ऑर्डर विभाजन, असामान्य मूल्य व्यवहार आदि को चिन्हित कर रहा है। यह तकनीकी अस्वीकृति के दुरुपयोग और जानबूझकर उत्पाद वर्गीकरण गलत करने जैसी प्रवृत्तियों पर भी नज़र रखता है।
डेटा के अनुसार, अब तक 19 लाख से अधिक उत्पाद कैटलॉग की समीक्षा की गई है, जिनमें लगभग 91,000 त्रुटिपूर्ण सूची हटाई गई हैं। अधिकारियों ने 10,500 से अधिक संदिग्ध खरीद मामलों को चिन्हित किया है, जबकि 764 सांठगांठ मामले पकड़े गए और लगभग 450 विक्रेताओं को निलंबित किया गया।
इसके अतिरिक्त, मूल्य शासन उपकरणों ने 11,000 से अधिक असामान्य मूल्य मामलों की समीक्षा की है और हजारों गलत सूचियाँ हटाई गई हैं। AI आधारित सिस्टम ने सूचीकरण चरण में 10 लाख से अधिक गलत मूल्य निर्धारण की घटनाओं को रोका है। ये प्रणाली रियल-टाइम एनालिटिक्स और बिड हेल्थ स्कोरिंग जैसे उपकरणों से समर्थित हैं, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुधारने और हेरफेर को कम करने में मदद कर रहे हैं।
यह पहल GeM की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है, क्योंकि प्लेटफॉर्म का कुल लेनदेन (GMV) 18.4 लाख करोड़ रुपये पार कर चुका है, जिसमें वित्त वर्ष 2026 में 5 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं।





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