नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026।
पश्चिम दिशा में जारी संघर्ष के बीच भारत के एलपीजी टैंकर ग्रीन सानवी ने हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर देश को राहत दी है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस संकरे मार्ग से गुजरने वाले मालवाहक और ऊर्जा टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। ईरान की नाकाबंदी के कारण विश्व स्तर पर ऊर्जा संकट का खतरा उत्पन्न हुआ, लेकिन भारत ने अपने जहाजों को सुरक्षित निकालकर कूटनीतिक सफलता दर्ज की।
अब तक हॉर्मुज स्ट्रेट से ग्रीन सानवी समेत आठ भारतीय जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं। इनमें शिवालिक, नंदा देवी, जग लाड़की, पाइन गैस, जग वसंत, बीडब्ल्यू टायर और बीडब्ल्यू एल्म शामिल हैं। इसके अलावा ग्रीन आशा और जग विक्रम भी आने वाले दिनों में इस मार्ग से पार कर भारत पहुंचेंगे। इस सफलता के साथ भारत उन देशों में शामिल हो गया है जिनके सबसे अधिक जहाज युद्ध प्रभावित हॉर्मुज से सुरक्षित गुजरे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन जहाजों के सुरक्षित गुजरने से भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को संकट के समय भी सुनिश्चित रखा है। फिलहाल 15 से अधिक भारतीय झंडे वाले जहाज हॉर्मुज के मुहाने पर हैं, जिन पर लगभग 485 नाविक सवार हैं। भारत सरकार ईरान के साथ लगातार कूटनीतिक बातचीत कर इन जहाजों को सुरक्षित निकालने में सक्षम होने की उम्मीद कर रही है।
जानकारों के अनुसार हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल परिवहन का अहम मार्ग है, जहां से लगभग 20 से 30 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। युद्ध की शुरुआत के बाद ईरान ने इसे ब्लॉक कर दिया था। इस संकरे मार्ग में केवल 33 किलोमीटर चौड़ाई है, और ईरान के पास ऐसी मिसाइलें हैं जो विशाल टैंकर को मिनटों में नुकसान पहुँचा सकती हैं।
ईरान के साथ भारत की लगातार बातचीत के कारण मित्र देशों के जहाज इस मार्ग से गुजर सकते हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत का नाम दोस्त के रूप में लिया, जिससे हॉर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने का मार्ग सुनिश्चित हुआ।











