05 अप्रैल 2026, पेरिस/सियोलफ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक मंच से देशों को बड़ा संदेश देते हुए अमेरिका और चीन के प्रभाव से दूर रहने की अपील की है। उन्होंने समान विचारधारा वाले देशों से “स्वतंत्रता गठबंधन” बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि दुनिया के देशों को किसी एक शक्ति का “जागीरदार” बनने से बचना चाहिए।
दक्षिण कोरिया के सियोल में अपने संबोधन के दौरान मैक्रों ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अस्थिरता बढ़ रही है और पारंपरिक संतुलन कमजोर पड़ रहा है। ऐसे में लोकतंत्र, अंतरराष्ट्रीय कानून और जलवायु जैसे साझा मूल्यों के आधार पर एक नई व्यवस्था की जरूरत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य दो प्रमुख शक्तियों — संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन — के प्रभाव में आना नहीं है। मैक्रों ने कहा कि न तो चीन के प्रभुत्व पर निर्भर रहना उचित है और न ही अमेरिका की नीतिगत अनिश्चितता पर अत्यधिक निर्भर होना चाहिए।
मैक्रों ने दक्षिण कोरिया, जापान, ब्राजील, भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से इस प्रस्तावित गठबंधन में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था में देशों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी और केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भी मैक्रों ने सैन्य समाधान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल बमबारी या सैन्य कार्रवाई से स्थिति को स्थिर नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए कूटनीतिक और बहुपक्षीय प्रयास जरूरी हैं।
इस संदर्भ में मैक्रों ने डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी की और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई के मुद्दे पर फ्रांस के रुख को भी स्पष्ट किया।
विश्लेषकों का मानना है कि मैक्रों का यह बयान बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन और यूरोप की स्वतंत्र रणनीतिक पहचान को स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।




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