वॉशिंगटन, 03 अप्रैल 2026।
नाटो को लेकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख एक बार फिर सख्त नजर आ रहा है। वर्षों से संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे ट्रंप अब अमेरिका की सदस्यता को लेकर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने नाटो को अप्रभावी बताते हुए इसे लेकर असंतोष जाहिर किया है।
ट्रंप के हालिया बयान में नाटो की भूमिका पर सीधे सवाल खड़े किए गए हैं। उनका मानना है कि ईरान युद्ध के दौरान संगठन ने अमेरिका का साथ नहीं दिया, जबकि उस समय समर्थन की अपेक्षा थी। इसी वजह से उन्होंने नाटो की उपयोगिता पर पुनर्विचार करने की बात कही है।
हालांकि नाटो के नियमों के अनुसार, किसी सदस्य देश को तब तक सैन्य सहायता देना अनिवार्य नहीं होता जब तक उस पर सीधा हमला न हुआ हो। इस मामले में अमेरिका पर कोई हमला नहीं हुआ था और उसने कार्रवाई से पहले अन्य सदस्य देशों से परामर्श भी नहीं किया था।
ट्रंप ने अपने बयान में नाटो को “कागजी शेर” तक करार दिया और संकेत दिए कि अमेरिका के बाहर निकलने का फैसला लगभग तय हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका पर हमला होता है, तो नाटो देश उसकी रक्षा के लिए आगे नहीं आएंगे, जबकि अमेरिका यूरोप की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।








