05 अप्रैल 2026, वियनाऑस्ट्रिया के उप-चांसलर आंद्रेयास बाबलेर ने स्पष्ट किया है कि उनका देश किसी भी सैन्य टकराव का हिस्सा नहीं बनेगा और अपनी पारंपरिक तटस्थ नीति पर अडिग रहेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि ऑस्ट्रिया इस दिशा में कोई समझौता नहीं करेगा।
वियना में दिए बयान में बाबलेर ने कहा कि ऑस्ट्रिया अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग बिना सख्त जांच के किसी भी सैन्य गतिविधि के लिए नहीं होने देगा। उन्होंने इसे देश की "गैर-समझौता योग्य" नीति बताते हुए कहा कि हर सैन्य उड़ान की गहन जांच जरूरी है, चाहे वह सीधे युद्ध क्षेत्र में प्रवेश कर रही हो या किसी अभियान में सहयोग कर रही हो।
पश्चिम एशिया में संयुक्त राज्य अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच ऑस्ट्रिया का यह रुख यूरोप में उभरते रणनीतिक मतभेदों को दर्शाता है। वहीं नाटो के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं।
उप-चांसलर ने सोशल मीडिया मंच पर भी अपने विचार रखते हुए कहा कि ऑस्ट्रिया की तटस्थता उसकी पहचान है और इसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य विमानों की आवाजाही को लेकर स्पष्ट सीमाएं तय करना समय की आवश्यकता है।
उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रिया वर्ष 1955 से तटस्थता की नीति का पालन करता आ रहा है, जिसके तहत वह किसी सैन्य गठबंधन में शामिल नहीं होता और अपने यहां विदेशी सैन्य अड्डों की अनुमति नहीं देता।
इस बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है और कई देशों ने सैन्य भागीदारी को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रिया का यह बयान वैश्विक राजनीति में बदलते समीकरणों और गठबंधनों के भीतर बढ़ती असहमति को उजागर करता है।










