नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026।
केंद्र सरकार युद्ध के बीच घरेलू ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुकिंग गैस पर निर्भरता कम करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
शुक्रवार को इस दिशा में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव, विद्युत सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के प्रमुख शामिल हुए। बैठक में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए इंडक्शन हीटर और अन्य कुकिंग उपकरणों के उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, युद्ध के कारण इंडक्शन हीटर और इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग में काफी बढ़ोतरी देखी जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारत को संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
सरकार इस समय आयात पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रही है, विशेषकर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों में। पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क कम किया जा चुका है ताकि सप्लाई बनी रहे और लागत का दबाव कम हो। सरकार का मुख्य फोकस जरूरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता कम करना है।
कतर के एक बड़े एलएनजी प्लांट को नुकसान पहुंचने और होर्मुज जलडमरूमध्य की मुश्किल स्थिति के बीच भारत ने अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाई है। रूस, नाइजीरिया, अंगोला और अमेरिका से कच्चा तेल और गैस आयात किया जा रहा है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अमेरिका ईरान पर अगले 2-3 हफ्तों में ‘बेहद कड़ा प्रहार’ करेगा और उसे ‘पाषाण युग’ में ले जाएगा। इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उस समय मध्य पूर्व में न तेल था और न गैस का उत्पादन होता था।
ईरान ने युद्धविराम और 15-सूत्रीय शांति योजना की खबरों को खारिज करते हुए इसे ‘एकतरफा और अव्यवहारिक’ बताया है।










