विशाखापत्तनम, 03 अप्रैल।
रक्षा मंत्री ने 03 अप्रैल, 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में ‘लार्ज कैविटेशन टनल’ परियोजना का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत को एक शक्तिशाली नौसेना और रक्षा प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनाएगी, जो देश की रक्षा क्षमता को और सशक्त करेगी।
नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला की सराहनारक्षा मंत्री ने प्रयोगशाला के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि संस्थान ने टॉरपीडो सिस्टम, पानी के नीचे की माइंस, डिकॉय और एयूवी (AUV) जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान किया है, जिससे नए मानक स्थापित हुए हैं। उन्होंने भविष्य की युद्ध-तैयारी के लिए ‘स्वार्म टेक्नोलॉजी’ और लिथियम-आयन बैटरी के विकास को महत्वपूर्ण बताया।
रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने का आह्वानमंत्री ने यह भी कहा कि नई और उन्नत तकनीकों के विकास से समुद्र में तैनात सैनिकों का आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ेगा। इसके साथ ही, इन तकनीकों से रक्षा बलों की कार्यक्षमता में भी अभूतपूर्व सुधार होगा। उन्होंने NSTL से अनुरोध किया कि वह देश की सुरक्षा संरचना को मजबूत करने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण से काम करता रहे।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की उपस्थितिइस कार्यक्रम में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष, नौसेना प्रमुख और पूर्वी नौसेना कमान के प्रमुख सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने परियोजना की महत्वता और भारत की रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने में इसके योगदान को रेखांकित किया।
लार्ज कैविटेशन टनल की विशेषताएँयह परियोजना, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, भारत में हाइड्रोडायनामिक अनुसंधान क्षमताओं को सशक्त करेगी। इसके माध्यम से अगली पीढ़ी के जहाजों, पनडुब्बियों और पानी के भीतर संचालित प्लेटफार्मों के डिजाइन और विकास में तेजी आएगी।
वैश्विक स्तर की सुविधाएँयह सुविधा, क्लोज्ड-लूप और फ्री-सरफेस सिमुलेशन दोनों को एक ही सेटअप में संचालित करने की क्षमता रखती है, जो इसे दुनिया भर में अद्वितीय बनाती है। इसके शुरू होने के बाद, भारतीय नौसैनिक प्लेटफार्मों के डिजाइन और प्रणोदन प्रणालियों के परीक्षण में नई ऊंचाइयाँ छूने का रास्ता खोला जाएगा।
जहाज निर्माण उद्योग को मिलेगी गतिपरियोजना के सफल संचालन के बाद देश के जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को नया बल मिलेगा और भारतीय रक्षा तकनीकी क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।


.jpg)









