बारामूला, 04 अप्रैल।
देश के रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को उत्तर कश्मीर के रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों का दौरा कर सेना की चिनार कोर की संचालन क्षमता और तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने नियंत्रण रेखा के आसपास की सुरक्षा स्थिति और सैन्य तैनाती की समीक्षा करते हुए बलों की उच्च स्तर की तत्परता, पेशेवर दक्षता और समन्वित कार्यप्रणाली की सराहना की।
दौरे के दौरान बारामूला में उन्हें भविष्य की सैन्य आवश्यकताओं और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सैन्य संचालन में उन्नत तकनीकी संसाधनों के समावेश पर विशेष ध्यान दिया गया है।
अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, ऐसे में पारंपरिक क्षेत्र आधारित रणनीति से आगे बढ़कर बहु-आयामी संचालन की दिशा में कदम बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक संघर्षों में थल, वायु, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष और मानसिक क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल निर्णायक भूमिका निभाता है।
उन्होंने संयुक्तता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सेनाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए साझा प्रशिक्षण, एकरूप सिद्धांत और प्रभावी कमान प्रणाली आवश्यक है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
रक्षा प्रमुख ने भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी उन्नयन, मानसिक दृढ़ता और समग्र तैयारी पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि नवाचार, दूरदर्शी सोच और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास ही भविष्य की सुरक्षा को मजबूत बनाएंगे।
उन्होंने सभी सैन्य कर्मियों को हर प्रकार के संभावित संघर्षों के लिए पूरी तरह तैयार रहने का संदेश दिया। दौरे के दौरान उन्होंने बारामूला में नागरिक प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों से भी संवाद कर क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।











