भोपाल, 26 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने नई पहल की है। इसके तहत 27 अक्टूबर को देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस सहयोग से प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को आधुनिक संसाधनों, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और व्यावहारिक प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा।
जनसंपर्क अधिकारी राजेश दाहिमा ने सोमवार को बताया कि समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान समारोह भोपाल स्थित वल्लभ भवन मंत्रालय के सभाकक्ष में आयोजित होगा। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार उपस्थित रहेंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे।
प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ बढ़ेगा सहयोग
इस पहल के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान, वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए यूजीसी-डीएई कंसोर्टियम, क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम और हार्टफुलनेस संस्थान के साथ शैक्षणिक सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।
इन समझौतों से प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की शैक्षणिक विशेषज्ञता, शोध सुविधाओं और आधुनिक शिक्षण संसाधनों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए नई शिक्षण पद्धतियों, अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के रास्ते खुलेंगे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों पर रहेगा जोर
समझौता ज्ञापनों का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को तकनीकी बदलावों और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान और उभरती तकनीकों में विद्यार्थियों की दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्राध्यापकों के प्रशिक्षण और विद्यार्थियों की व्यावहारिक इंटर्नशिप को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, नए उद्यमों और उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयास होंगे। डिजाइन शिक्षा, पर्यटन प्रबंधन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित के साथ अन्य विषयों को भी इस साझेदारी में शामिल किया जाएगा, ताकि विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को कौशल विकास के अवसर मिल सकें।
रोजगार की संभावनाओं को मिलेगा विस्तार
उच्च शिक्षा विभाग की इस पहल से विद्यार्थियों को उद्योगों और संस्थानों की जरूरतों के अनुसार अपनी क्षमताएं विकसित करने में मदद मिलेगी। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ शोध, कौशल विकास और नवाचार को बढ़ावा देना इसका प्रमुख लक्ष्य है।
विभाग ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना चाहता है, जिसमें विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिले और वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बन सकें। इससे रोजगार के नए अवसरों की संभावनाओं को भी विस्तार मिलने की उम्मीद है।














