कोलकाता, 18 जून।
पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियां शांत होने के बाद अब केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी में भारी कटौती करने का फैसला लिया गया है। सूबे में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए केंद्रीय बलों की कुल 500 कंपनियों को रोक कर रखा गया था, जिसकी तादाद को अब बड़े पैमाने पर घटाकर मात्र 150 कंपनियां कर दिया गया है।
उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह कदम राज्य में मौजूदा शांतिपूर्ण माहौल और पूरी तरह नियंत्रण में चल रही कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखकर उठाया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली सरकार ने राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन को कानून का राज स्थापित रखने के लिए पूरी स्वायत्तता प्रदान की है, जिसके बाद केंद्रीय बलों की इस वापसी का रास्ता साफ हुआ।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद एहतियात के तौर पर राज्य सचिवालय नवान्न सहित कई अन्य संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों पर केंद्रीय बलों का कड़ा पहरा बैठाया गया था। उस दौरान सरकारी फाइलों, दस्तावेजों और गोपनीय अभिलेखों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए विशेष निगरानी तंत्र सक्रिय किया गया था, जिसके तहत नवान्न की सुरक्षा की पूरी कमान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने संभाल रखी थी।
इस सुरक्षा घेरे के तहत सचिवालय में आने-जाने वाले तमाम अधिकारी-कर्मचारियों के पहचान पत्रों (आईडी कार्ड) की बारीकी से जांच और उनके सामानों की तलाशी की जिम्मेदारी भी केंद्रीय बल ही निभा रहे थे। हालांकि, बीते बुधवार से नवान्न के बाहरी परिसरों से इन बलों को पूरी तरह हटा लिया गया है। प्रशासनिक गलियारों के अनुसार, सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था का नया और वैकल्पिक खाका पहले ही मुकम्मल किया जा चुका है।
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि इस बार पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को दो चरणों में विभाजित कर संपन्न कराया गया था। मतदान के दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े बंदोबस्त करते हुए इतिहास में सबसे ज्यादा कुल 2,407 कंपनियां तैनात की गई थीं, जो गुजरे चुनावों के मुकाबले बहुत अधिक थीं। यही वजह रही कि इस बार की पूरी चुनावी प्रक्रिया ऐतिहासिक रूप से शांतिपूर्ण और लगभग पूरी तरह से हिंसामुक्त रही।
चुनाव संपन्न होने के बाद किसी भी तरह की राजनीतिक प्रतिशोध या संभावित अशांति की आशंका को टालने के लिए 500 कंपनियों को तटीय व अन्य क्षेत्रों में तैनात रखा गया था, लेकिन अब मैदानी हालात पूरी तरह सामान्य होने के चलते इनकी संख्या को घटाकर 150 कंपनियों तक सीमित कर दिया गया है।














