शिमला, 18 जून।
पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से इस विषय पर कानून बनाने और इस व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि युवक-युवती आपसी सहमति और प्रेम संबंध में हैं तो उन्हें विवाह करना चाहिए, अन्यथा अपने-अपने परिवारों के साथ रहना उचित होगा।
गुरुवार को जारी अपने बयान में शांता कुमार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया निर्णय का उल्लेख करते हुए उसका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एक युवक और युवती ने अदालत से सुरक्षा की मांग की थी, क्योंकि उनके परिजन उन्हें घर लौटने के लिए कह रहे थे।
उन्होंने बताया कि न्यायालय ने सुरक्षा प्रदान करने से इनकार करते हुए कहा कि दोनों के कदम से उनके परिवारों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। अदालत ने यह भी माना कि इस स्थिति के कारण संबंधित परिवारों को सामाजिक स्तर पर बदनामी का सामना करना पड़ सकता है।
शांता कुमार के अनुसार न्यायालय ने अपने फैसले में यह टिप्पणी भी की है कि पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव के चलते लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अदालत ने भारतीय परंपराओं, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक व्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित किया है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक और शांतिपूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। न्यायालय ने यह भी माना कि विवाह के बिना साथ रहने की स्थिति में परिवारों के सम्मानजनक जीवन के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के कारण ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कुछ गंभीर अपराध और हत्या के मामले भी सामने आए हैं, जिससे समाज में गलत संदेश पहुंच रहा है।
शांता कुमार का कहना है कि यह प्रवृत्ति भारतीय सामाजिक और नैतिक मूल्यों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण के लिए इस विषय पर स्पष्ट कानून बनाया जाए तथा लिव-इन रिलेशनशिप पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार किया जाए।














